
सरसों तेल: भाव के ताव से रसोई का निकला तेल, लगातार बढ़ रहे दाम, जानिए कैसे बजट बिगाड़ रहा सरसों तेल
अलवर. तेल के दामों में आग की बात होते ही सबका ध्यान पेट्रोल और डीजल के बेलगाम दाम पर जाता है। जबकि यहां तेल की मार से गृहिणी लाचार है। हम बात कर रहे हैं सरसों के तेल की। पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, देश के हर कोने में सरसों के तेल की मांग रहती है।
पूर्वांचल से लेकर उत्तरांचल और दक्षिण तक सरसों के तेल ने देशवासियों के रसोई का बजट गड़बड़ा दिया है। सरसों के एक लीटर तेल की कीमत बढ़ते-बढ़ते अब 200 रुपए पार हो चुकी है। कुछ नामी ब्रांड का शुद्ध सरसों का तेल तो 220 से 225 रुपए लीटर तक मिल पाता है। जबकि अन्य अच्छे ब्रांड के सरसों तेल के दाम औसत 175 से 205 रुपए लीटर तक हैं। मजदूरों से लेकर धन्ना सेठों तक की रसोई में युगों-युगों से सरसों के तेल की महक कायम है। पर अब बेतहाशा बढते दामों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। दिवाली के दीपक भी इस बार महेंगे ही जलेंगे।
सरसों के भाव भले ही किसानों की किस्मत को चमका रहे हों, लेकिन उछलते दामों ने रसोई का 'तेल' निकाल दिया है। अभी भी 'तेल देखो और तेल की धार देखो' की तर्ज पर दाम काबू में आते नजर नहीं आ रहे। ऐसे में 'तड़का' अब आमजन को 'फटका' लगाता नजर आ रहा है। हालांकि सरसों की शुद्धता और सौंधी खुशबू लोगों को लुभा रही है, लेकिन बेकाबू भाव 'छौंक' पर अंकुश लगा रहे हैं। सरसों तेल के उछाल मारते दामों ने रसोई का बजट गड़बड़ा दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो तेल में मिलावट नहीं करने की सख्ती से तेल के भाव आसमान छू रहे हैं।
सरसों के भाव में तेजी के लिए विशेषज्ञ सौ फीसदी शुद्ध सरसों का तेल ही बाजार में लाने की सरकार की सख्ती का असर मानते हैं। सरसों तेल के कारोबार से जुड़े व्यापारियों का मानना है कि सरसों की बंपर उत्पादन भी भारत की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी है। पिछले वित्त्ीय वर्ष में ही 70 हजार करोड़ का खाद्य तेल आयात किया गया। किसानों और तेल उद्योग को सरकारी मदद मिले और तिलहन उत्पादन बढ़े तो देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।
दामों की बात करें तो पिछले दो माह में सरसों के तेल के दाम 20 से 24 फीसदी तक बढ़े हैं। सरसों के तेल पर करीब 25 से 30 फीसदी की महंगाई तो जस की तस बनी हुई है। हालांकि आने वाले दिनों में दाम कम होने की संभावना भी कम नजर आ रही है। शुद्ध सरसों के तेल की मांग फिलहाल लगातार बढ़ेगी। इसके दो सौ रुपए के पार जाने की संभावना है। सरसों के तेल में पिछले वर्ष तक करीब तीस फीसदी तक चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम तेल या अन्य किसी सस्ते खाद्य तेल की मिलावट की जाती थी। मिलावट पर सरकार ने पिछले वर्ष एक अक्टूबर 2020 से रोक लगा दी। भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मिलावट पर रोक लगाने के फैसले से उपभोक्ताओं और सरसों उत्पादक किसानों को भी फायदा हुआ है, लेकिन इससे रसोई का बजट गड़बड़ा गया है।
कच्ची घानी के तेल की मांग खूब
समुद्र के तटवर्ती राज्यों और पूर्वोत्तर में अलवर और भरतपुर के कच्ची घानी के तेल की खासी मांग बनी हुई है। कच्ची घानी सरसों तेल बनाने का वही परम्परागत रूप कोल्हू से तेल निकालना है। इस तेल में झाग के कारण तीखापन होता है। यह मछली का स्वाद बढ़ाता है। अलवर से कच्ची घानी का पूर्वोत्तर राज्यों को प्रतिदिन कई टैंकर तेल भेजने वाले कारोबारी अजय आनंद गोयल कहते हैं कि इस साल सरसों के भाव खूब हैं। भरतपुर के प्रमुख तेल व्यवसायी कृष्ण कुमार अग्रवाल बताते हैं कि प्रदेश से बाहर भी भरतपुरी सरसों के तेल को बड़े चाव से खाया जाता है। यही वजह है कि सरसों के तेल की डिमांड हमेशा बनी रहती है। स्थानीय बाजार में भी इसकी शुद्धता और सौंधी खुशबू लोगों को लुभाती है।
सरसों तेल से जुड़ी खास बातें
- एक क्विंटल सरसों में औसतन करीब 35 लीटर तेल तैयार होता है।
- शुद्ध तेल का दाम 170 रुपए प्रतिकिलो है।
- करीब 60 किलो खली निकलेगी, जो 22 रुपए किलो है।
- इस तरह एक क्विंटल सरसों में 1320 रुपए की खली होती है।
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यूं लगाई तेल ने छलांग
तेल का भाव सरसों रुपए प्रति लीटर खुदरा बाजार भाव
2017 ---80
2018--- 90
2019 ---100
2020--- 120
2021 ---190
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यूं चढ़े सरसों के भाव
रुपए--- प्रति क्विंटल
अप्रेल 2017 ---3500
अप्रेल 2018 ---3500
अप्रेल 2019--- 3450
अप्रेल 2020--- 3900
अप्रेल 2021 ---7000
हालांकि मार्च में भाव 5000 रुपए प्रति क्विंटल भाव आया। अप्रेल में बढ़कर 5700 और अब 7725 से 8020 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है।
राजस्थान अव्वल
देश में सरसों की पैदावार में राजस्थान पहले पायदान पर है। पिछले वर्ष सरसों पैदावार 90 लाख टन हुई। इतनी सरसों उपज से करीब 36 लाख टन तेल तैयार होता है। सरसों उत्पादन में राजस्थान की करीब 35 से 40 फीसदी की हिस्सेदारी है। राजस्थान में 2020 में 32 लाख टन सरसों की पैदावार हुई थी। वर्ष 2019-20 में 27 लाख 65 हजार 251 हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों बोई गई थी। देश में करीब 250 लाख टन तेल की खपत है। इस मांग की पूर्ति के लिए मलेशिया एवं इंडोनेशिया आदि देशों से पाम ऑयल का आयात किया जाता है।
कैसे निकलेगा हल
सरसों तेल कारोबारियों का मानना है कि बंपर उत्पादन के बावजूद देश की खाद्य तेल की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती। आत्?मनिर्भरता के लिए घरेलू स्तर पर किसानों और तेल उद्योग को समर्थन देने के साथ ही तिलहन उत्पादन को बढ़ाया जाना चाहिए।
इनका कहना है ...
मांग के मुकाबले शुद्ध तेल का उत्पादन कम
एफएसएसएआई के आदेश सरसों तेल को पैकिंग में ही बेचने के हैं। इससे शुद्ध तेल की मांग बढ़ी है। मांग के मुकाबले शुद्ध तेल का उत्पादन कम है। इससे दाम बढऩा लाजमी है।
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मोहनलाल मंगल, खाद्य व्यापार मंडल अध्यक्षए सवाईमाधोपुर
भविष्यय में भी शुद्ध सरसों के तेल की मांग लगातार बढ़ेगी। आपूर्ति कम होगी तो शीघ्र ही सरसों तेल के दाम 200 रुपए प्रतिकिलो तक पहुंच सकते हैं।
- दीनदयाल अग्रवालए व्यापारी, सवाईमाधोपुर
मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं होने से दाम बढऩा स्वाभाविक है। पाम ऑयल का आयात कम होने से भी मांग बढ़ी है। शुद्ध सरसों के तेल की अनिवार्यता से उपभोक्ता को ही फायदा है।
- सीताराम गुप्ता, विषय विशेषज्ञ भरतपुर
Published on:
08 Oct 2021 07:44 pm

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