अलवर. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा ङ्क्षहदू धर्म का विशेष त्योहार है। धूमधाम के साथ दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस बार 24 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। दशहरे पर हर साल रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता रहा है। मगर कमर तोड़ रही महंगाई ने त्योहारों की रंगत फीकी कर दी है। इसी के चलते रावण के पुतलों पर भी महंगाई की मार है।
बांस और कागज के दामों में 20 से 25 प्रतिशत उछाल आने से रावण के पुतलों के भी भाव बढ़ गए हैं। इसके अलावा पुतलों की मांग बढऩे से भी खासकर छोटे पुतले महंगे बिक रहे हैं। मांग इसलिए बढ़ी, क्योंकि कोरोना के बाद से बहुत से लोग भीड़भाड़ में नहीं जाना चाहते। इसके चलते लोग छोटे-छोटे पुतले लेकर मोहल्ले में ही उनका दहन करना मुनासिब समझते हैं।
जेल चौराहे पर पुतले कर रहे तैयार : इन दिनों शहर के जेल चौराहे के समीप बिक्री के लिए रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है। यहां यूपी से आए कारीगर पुतले तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मांग के अनुरूप छोटे साइज के पुतले अधिक हैं। दशहरा आने से एक डेढ़ माह पहले ही पुतला बनाने का कार्य कारीगर शुरू कर देते हैं, ताकि मांग के अनुरूप लोगों को रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतले उन्हें समय पर अपनी मन पसंद मिल सके।
सामग्री की कीमतें बढ़ी
कारीगर विकास कुमार बताते हैं कि रावण के पुतलों में लगने वाली सामग्री जैसे बांस, टाट, घास, तार के साथ अन्य सामानों की कीमतों के आसमान छूते भावों ने दशानन को महंगा बना दिया है। यही कारण है कि शहर में ऐसे कई आयोजक भी हैं, जिन्होंने रावण दहन के कार्यक्रम ही बंद कर दिए। पहले जो अखबारी कागज 10 रुपए किलो में मिल जाता था। अब वह 15 से 20 रुपए किलो में मिल रहा है। रंगीन कागज भी महंगा हो गया है। डीजल के भाव भी बढ़ रहे है।