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जिन दवाइयों की मरीज को जरूरत नहीं थी, फिर भी कमीशन के लिए दी जा रही थीं, बड़ा घोटाला पकड़ा

सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार लिमिटेड की दुकानों पर दी जा रहीं दवाओं के बिलों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचे दस दिन के बिलों की जांच की गई तो करीब 12 लाख का घोटाला मिला है।

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अलवर

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Kirti Verma

May 07, 2023

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अलवर पत्रिका. सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार लिमिटेड की दुकानों पर दी जा रहीं दवाओं के बिलों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचे दस दिन के बिलों की जांच की गई तो करीब 12 लाख का घोटाला मिला है। यह रिकवरी की जाएगी। हैरत तो ये है कि कर्मचारियों व पेंशनर्स आदि को यहां से दवाएं दी जाती हैं। जिन दवाओं की आवश्यकता नहीं थी वह भी चिकित्सकों की ओर से लिखी गईं और उन्हें दी गईं। यानी उनके सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया। जानकारों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो। दवाएं लिखने वाले चिकित्सकों को नौकरी से हटाया जाए। यह भी मांग की जा रही है कि भंडारों के खुलने से लेकर अब तक के सभी बिलों की एसओजी जांच करवाई जाए।

स्वास्थ्य विभाग को उपभोक्ता होलसेल भंडार की ओर से प्रस्तुत किए गए करीब 52 लाख के बिलों की अभी तक की जांच में करीब 12 लाख की रिकवरी निकली है। वहीं, विभागीय जांच अभी जारी है। ऐसे मेें इन दुकानों में बड़े गबन की आशंका है। उपभोक्ता भंडार की दुकानों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक जांच टीम गठित की गई थी। जांच टीम की ओर से अभी तक 21 मार्च 2020 से 31 मार्च 2020 तक केवल 10 दिन के बिलों की जांच में ही 11 लाख 80 हजार रुपए की रिकवरी सामने आई है।

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इन बिन्दुओं पर हो रही जांच

जांच में डायरी की सीमा राशि, पेंशनर्स के हस्ताक्षर मिलान, रोग का नाम व डाइग्नोसिस सहित अनेक बिन्दुओं को जांच में शामिल किया गया है।

एक ही साल्ट की अलग-अलग दवाएं दी जा रही थीं मरीजों को
राज्य सरकार की ओर से चिकित्सक को केवल जेनरिक दवाएं लिखने व उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इसके बाद भी चिकित्सक से ब्रांडेड दवाएं लिखवाकर रोगी को ब्रांडेड दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। यही नहीं भण्डार महाप्रबंधक की ओर से पूर्व में जिन दवाओं के रेट कॉन्ट्रेक्ट किए हुए थे। उन रेटों पर जेनरिक दवा की खरीद भी नहीं की गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि अभी भी रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं होने से होलसेल दवा विक्रेताओं की दवा की दरों में एकरूपता नहीं थी। इसके कारण एक ही साल्ट की दवा अलग-अलग रेट पर मरीजों को उपलब्ध हो रही है। इससे राज्य सरकार पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।

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मरीजों की ओर से मिल रही थी शिकायतें
उपभोक्ता भंडार की दुकानों की काफी समय से मरीजों की ओर से शिकायतें मिल रही थी कि उन्हें अनावश्यक दवाएं दे दी गईं और अधिक भुगतान पेश कर दिए गए। इस पर डीएम ने जांच कमेटी बनाई गई थी। इस दौरान 10 दिन के बिलों की जांच में 11 लाख 80 हजार रुपए की रिकवरी निकली है।
डॉ. अरविंद गेट, कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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