बहरोड़. क्षेत्र के युवा अब खेती में विभिन्न नवाचार कर रहे है। चंदन की खुशबू फिजां को खुशनुमा बना देती है। अगर ये महक किसान को खुशहाल बना दे तो क्या कहना लेकिन अब क्षेत्र के किसान ने यह सब कर दिखाया है। क्षेत्र का युवा किसान परम्परागत खेती के साथ खेतो में सफेद चंदन के पौधे रोप किस्मत आजमा रहा है। मांचल गांव निवासी युवा किसान हेमंत ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व जयपुर के प्रसिद्ध रामनिवास बाग से सफेद चंदन के पेड़ चोरी हुए तो उसको लेकर जांच पड़ताल की। जिसके बाद युवा किसान हेमंत ने बैंगलौर जाकर चंदन की खेती को लेकर जानकारी एकत्रित कर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
तीन साल में लगाए एक सौ पेड़: हेमंत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वह घर पर था। इससे पूर्व वह एक कम्पनी में नौकरी कर रहा था। जहाँ पर उसकी नौकरी चली गई तो वह घर पर रहकर खेती बाड़ी के लिए तैयार हो रहा था। इसी दौरान उसे पता चला कि जयपुर के रामनिवास बाग से सफेद चंदन के पेड़ चोरी हो गए है। जिस पर उसने सफेद चंदन को लेकर जानकारी इक_ा की तो पता चला कि इसकी खेती की जा सकती है और इसका उपयोग दवाई बनाने के लिए किया जाता है। जिसके बाद उसने तमिलनाडु से चार सौ रुपए के हिसाब से पहले बीस पौध मंगवाई। जब पौध बड़ी हो गई तो उसने करीब एक सौ ओर पौध मंगवा कर खेत में लगाई। वर्तमान में खेत में एक सौ से अधिक पौध 4 से 12 फीट बडी हो चुकी है।
पांच वर्ष में मिलेगी खुशबू, 10 वर्ष
बाद होगी कटाई
युवा किसान हेमंत ने बताया कि सफेद चंदन के पेड़ से पांच वर्ष बाद खुशबू आना शुरू हो जाती है। इसकी कटाई 10 वर्ष बाद की जाती है। वर्तमान में एक सफेद चंदन के पेड़ की बाजार में कीमत 3 से 4 लाख रुपए है। चंदन के पेड़ की जड़ो से करीब दो लीटर तेल निकलता है। जिसका बाजार भाव भी करीब एक लाख रुपए लीटर है।