शहर का आरटीओ कार्यालय...यहां कोई काम बिना सुविधा शुल्क दिए नहीं होता। हर काम के दाम यहां तय हैं। यहां तक कि जानकारी भी बिना भेंट पूजा नहीं मिलती। कार्यालय में पहुंचते ही दलालों नजरें एेसे घूरती हैं, जैसे कि कोई खजाना हाथ लगने वाला हो।
शहर का आरटीओ कार्यालय...यहां कोई काम बिना सुविधा शुल्क दिए नहीं होता। हर काम के दाम यहां तय हैं। यहां तक कि जानकारी भी बिना भेंट पूजा नहीं मिलती। कार्यालय में पहुंचते ही दलालों नजरें एेसे घूरती हैं, जैसे कि कोई खजाना हाथ लगने वाला हो। परिवहन कार्यालय में काम के लिए दलालों का सहारा लेना लोगों की मजबूरी बना दिया गया है।
लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया स्वागत कक्ष बाहर बैठे गार्ड के हवाले है। राजस्थान पत्रिका की टीम ने मंगलवार को अलवर के आरटीओ कार्यालय में करीब एक घंटे तक व्यवस्थाओं एवं कार्यप्रणाली का जायजा लिया तो कई चौंकाने वाले वाकये सामने आए। कार्यालय में पहुंचते ही एक दलाल आया व काम कराने के लिए बोलने लगा।
किसी तरह से उसको मना किया। तो लाइसेंस बनवाने, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कराने, पुराने लाइसेंस का रिन्यू कराने, गाड़ी का फिटनेस कराने सहित अन्य कार्यों की जानकारी देने वाला कोई नहीं था। कुछ देर घूमने के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई।
एक व्यक्ति ने कहा कि अगर कार्य कराना है तो दलाल से मिलना होगा। उसके बिना कोई कार्य नहीं होगा। दलाल के पास पहुंचने पर पता चला कि लाइसेंस बनवाने से लेकर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन तक प्रत्येक कार्य के लिए उसका अलग शुल्क निर्धारित है।
घर बैठे हो सकता है काम
आरटीओ कार्यालय में अगर आपका कोई कार्य है तो आप घर बैठे अपना कार्य करा सकते हैं। दरअसल परिवहन विभाग कार्यालय में प्रत्येक कार्य का शुल्क निर्धारित है। अगर आप उपस्थित हैं तो, शुल्क कम देना पड़ता। है लेकिन अगर आप अनुपस्थित हैं। तो दलाल को अधिक शुल्क देना पड़ता है।