अलवर

कोर्ट की सख्ती से रुकेा सरिस्का में मानवीय दखल

सरिस्का टाइगर रिजर्व में मानवीय दखल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उच्च स्तरीय समिति गठित कर 12 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्व: प्रेरणा से उपाय ढूंढने को कमेटी बनाई है। जानिए न्यायालय की सख्ती कैसे रोकेगी सरिस्का में मानवीय दखल।

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Sep 13, 2023
कोर्ट की सख्ती से रुकेा सरिस्का में मानवीय दखल


अलवर. सरिस्का टाइगर रिजर्व में मानवीय दखल ने बाघों के कुनबे पर ब्रेक लगाया है, यही कारण है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वाली ज्यादातर बाघिन अभी तक मां नहीं बन पाई है। सरिस्का में गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया धीमी होने के साथ ही पाण्डुपोल मंदिर में बड़ी संख्या में जाने वाले लोग भी समस्या का बड़ा कारण रहा है।यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्व:प्रेरणा से पाण्डुपोल मंदिर में आने वाले लाखों की समस्या का उपाय तलाशने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व िस्थत पाण्डुपोल मंदिर में लाखों लोगों के आने की बात सरिस्का अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में लिखित में बता भी चुके हैं। न्यायालय अब सरिस्का में स्थित मंदिर में आने वाले लाखों लोगों की समस्या का समाधान निकालने के प्रयास में जुटा है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनाई गई कमेटी भी इसी प्रयास का हिस्सा है।

यह मानना है सुप्रीम कोर्ट का

हमारा मानना है कि पूर्ण समाधान खोजने के लिए यह आवश्यक होगा कि विशेषज्ञों का एक समूह एक साथ बैठे और उचित समाधान निकाले। इसलिए समिति में राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण, सरिस्का के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए के उप वन संरक्षक स्तर के अधिकारी तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।

इसलिए उठाने पड़े यह कदम

सुप्रीम कोर्ट को स्व:प्रेरणा से समिति गठन करने का कदम उठाने का कारण सरिस्का टाइगर रिजर्व में बढ़ती मानवीय दखल से प्रभावित होते वन्यजीव है। अब यह समिति पाण्डुपोल में हर साल जाने वाले लाखों को नियंत्रित कर वन्यजीव एवं पर्यटन को बढ़ाने के उपाय बताएगी। न्यायालय की ओर से समिति को 12 सप्ताह का समय रिपोर्ट सौंपने के लिए दिया है। न्यायालय में गत 17 अप्रेल को यह आदेश पारित किए थे।

टास्क फोर्स कमेटी ने भी जताई थी चिंता

वर्ष 2005 में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बाघ विहिन घोषित होने के बाद केन्द्र सरकार की ओर से वीपी सिंह की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने भी सरिस्का में बढ़ती मानवीय दखल को चिंता का कारण बताया था। इसमें पाण्डुपोल मंदिर जाने वाले हजारों लोगों को मानवीय दखल का बड़ा कारण माना था।

मानवीय गतिवधियों से बाघों पर विपरीत असर

मानवीय गतिविधियां बढ़ने का सरिस्का में बाघों पर विपरीत असर पड़ा है। सरिस्का की दो से तीन बाघिन अब तक शावकों को जन्म नहीं दे सकी, वन्यजीव विशेषज्ञ इस समस्या का कारण भी मानवीय दखल मानते हैं।

Published on:
13 Sept 2023 11:01 pm
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