
सरिस्का के एक तालाब में एसटी-15 (फाइल फोटो)
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में भीषण गर्मी ने वन्यजीवों और पर्यटकों, दोनों पर असर डालना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, सरिस्का के बाघ अब खुले रास्तों के बजाय घने जंगल और जलाशयों की ओर रुख करने लगे हैं। इसका सीधा असर पर्यटकों की 'टाइगर साइटिंग' पर पड़ रहा है।
सरिस्का में वर्तमान में बाघों की संख्या 54 है। बीते सितंबर से मार्च तक का समय पर्यटकों के लिए शानदार रहा, जहां एसटी-2302 और उसके शावकों तथा टहला एरिया में एसटी-30 की अठखेलियों ने पर्यटकों का मन मोह लिया था। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से बढ़ी गर्मी ने बाघों का व्यवहार बदल दिया है।
वन अधिकारियों के अनुसार बाघ अब दिन में तीन से पांच घंटे तक पानी के स्रोतों के आसपास ही समय बिता रहे हैं। दोपहर 1 बजे से 4 बजे के बीच बाघ पेड़ों की घनी छांव में आराम करते हैं, जिससे सफारी पर जाने वाले पर्यटकों को उनकी झलक पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल, एसटी-21 और एसटी-15 जैसे बाघ मुख्य रूप से तालाबों के आसपास ही नजर आ रहे हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ ही सफारी के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई है। हालांकि, प्रबंधन को उम्मीद है कि स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही संख्या में फिर से उछाल आएगा। सरिस्का के इतिहास में पर्यटकों का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंच चुका है। बाघों के बेहतर प्रबंधन और प्रचार-प्रसार के कारण बड़ी संख्या में सैलानी ऑनलाइन बुकिंग के जरिए जिप्सियां बुक कर सरिस्का पहुंच रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यटकों से अपील की है कि वे गर्मी के दौरान सफारी के समय संयम बरतें और बाघों की प्राकृतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें। गर्मी का मौसम वन्यजीवों के लिए संवेदनशील होता है, इसलिए पानी के स्थानों के पास शांति बनाए रखना आवश्यक है। सरिस्का प्रशासन लगातार बाघों की मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Updated on:
21 Apr 2026 12:27 pm
Published on:
21 Apr 2026 12:27 pm
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