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अलवर. सरिस्का टाइगर रिजर्व की बाघिन एसटी-28 मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच सरकार ने सहायक वन संरक्षक हितेश सुतार को सौंप दी है। वे राजस्थान पत्रिका की ओर से एक्सपर्ट के हवाले से उठाए गए सभी सवालों के जवाब तलाशेंगे। एसटी-28 की मौत 2 फरवरी को होना बताई गई और सरिस्का प्रशासन ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। एक्सपर्ट ने बाघिन के शव के वीडियो व फोटो देखे, तो पाया कि बाघिन की बॉडी ड्राई हो चुकी थी। उस पर मिक्खयां भिनभिना रही थीं। सरिस्का प्रशासन ने मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया, लेकिन बाघिन के गले पर किसी प्रकार के निशान सामने नहीं आए। यह टेरिटोरियल फाइट भी एसटी-28 और उसकी मां एसटी-14 के बीच होना बताया गया। एक्सपर्ट ने इस पर कहा कि मां-बेटी की लड़ाई केवल दो से तीन साल के बीच संभव है, जबकि उनकी आयु 5 साल व 8 साल है। ऐसे में संघर्ष की संभावना नहीं है। इन तमाम सवालों को शामिल करते हुए राजस्थान पत्रिका ने रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका संज्ञान चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जयपुर केसीए अरुण प्रसाद ने लिया। उन्होंने पहले खुद प्रारंभिक स्तर पर जांच की और अब सहायक वन संरक्षक सरिस्का हितेश सुतार को जांच सौंप दी है।
भालू की मौत के मामले की भी होगी जांच
सरिस्का के भालू की करौली के जंगल में करीब 6 माह पहले हुई मौत का मामला भी सरकार के पास पहुंच गया है। उसकी भी तफ्तीश वन विभाग मुख्यालय अपने स्तर से करवा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर भालू की मौत को कैसे नेचुरल बताया गया? इस पर आधार पर जांच की तैयारी है।
बाघिन एसटी-28 की मौत होने के क्या कारण रहे, इसकी जांच सहायक वन संरक्षक हितेश को सौंपी है। साथ ही हम बिसरा जांच रिपोर्ट के आधार पर भी आगे एक्शन लेंगे। भालू की मौत के मामले में भी जानकारी की जा रही है।
केसीए अरुण प्रसाद, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जयपुर
Published on:
15 Feb 2026 11:02 am
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