अलवर. लोगों को ऑनलाइन सस्ते वाहन, जैविक खाद और डीलरशिप दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को उच्चैन थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से एक कार बरामद की है।
दो आरोपियों को पुलिस ने अलवर जिले में उनके घरों से पकड़ा है जबकि दो अन्य को सोमवार को शहर के सेवर चौराहे से धर दबोचा। ऑनलाइन ठगी करने वाला यह गिरोह सैकड़ों लोगों को शिकार बना चुका है। उनके बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर करीब 4 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा हुआ है।
पुलिस अधीक्षक हैदरअली जैदी ने बताया कि कुम्हेर के गांव महरावर निवासी राहुल कुमार गोयल ने गत 19 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने 24 सितम्बर को एक वेबसाइट पर कार विज्ञापन देख कथित मालिक अजयराज सिंह शेखावत निवासी जगदम्बा कॉलोनी वैशालीनगर जयपुर के मोबाइल पर बात की। कार खरीद का सौदा 1.50 लाख रुपए में तय किया। बात करने वाले ने अपना नाम योगेश सैनी बताते हुए आधार व पैन कार्ड के साथ एक बैंक अकाउंट में पांच हजार दो सौ रुपए ऑनलाइन जमा करवा लिए।
पैसे जमा होने के बाद संजय नामक व्यक्ति ने फोन किया कि कार अलवर आ गई है। डिलीवरी के लिए सौदे की आधी रकम जमा कराना जरूरी बताकर दो बार में 37500-37500 रुपए गत 27 सितम्बर को जमा करवाए। राशि जमा होने के बाद फिर फोन आया किबकाया देने पर ही कार मिलेगी। उसने रजिस्ट्रेशन अपने नाम पर होने पर भुगतान के लिए कहा तो सभी मोबाइल नम्बर बंद कर लिए।
जिसकी शिकायत पुलिस अधिकारियों को दी और रिपोर्ट दर्ज कराई। एसपी ने प्रकरण की जांच के लिए उच्चैन थाना प्रभारी रामचंद्र मीणा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। आरोपियों की अलवर, आमला व एमपी के बैतूल में तलाश कर रही टीम को गिरोह के अलवर में छिपे होने की सूचना मिली। टीम ने अलवर पुलिस की मदद से गांव केसरोली में 15 दिसम्बर की सुबह छापा मारकर सेहरून मेव व फिरोज मेव केसरोली को दबोच लिया। इसके अलावा दलखान मेव निवासी भट्टपुरा थाना नगर भरतपुर व तैयब मेव निासी ठेंगो का बास सोडोली थाना उद्योगनगर अलवर को सोमवार को सेवर चौराहे से पकड़ लिया। पकड़े गए ठगों के कब्जे से एक कार मिली है। उनके बैंक खातों में करीब 4 करोड़ रुपए के लेनदेन मिले हैं।
गिरोह की तीन अलग-अलग टीम हैं और इनके कार्य बंटे हुए हैं। पहली टीम गिरोह लोगों को झांसे में लेकर उनके एटीएम व चैकबुक ले लेते हैं और अपना मोबाइल नम्बर खाते में रजिस्टर करवाकर लापता हो जाते हैं। दूसरी टीम ऑनलाइन लोगों को सस्ते वाहन, नौकरी व ऋण दिलाने का लालच देकर ऑनलाइन राशि फर्जी खातों व पेटीएम अकाण्उटों में डलवाती है। तीसरी टीम ठगी की राशि के बंटवारे के लिए एटीएम कार्ड, पेटीएम, यूपीआई, आईएमपीएस के जरिए नकदी निकालती है।