बैँकों ने 1 अरब 40 करोड का ऋण देकर की मदद अलवर. आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर अलवर के ग्रामीण् अंचल में साफ नजर आने लगी है। जहां गांव गांव में महिलाएं स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनकर स्वरोजगार कर रही हैं।9 हजार स्वयं सहायता समूह में 1 लाख 6 हजार महिलाओं को मिला स्वरोजगार हैं।
ये महिलाएं सिलाई, ब्यूटीपार्लर के साथ साथ कृषि, पशुपालन, बागवानी, अचार, मुरब्बे, मंगोडी पापड़ बनाने के अलावा हस्तकला के उत्पाद बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही है।
कोरोना काल के दौरान जब परिवार के सदस्यों की नौकरी चली गई, बिजनेस ठप्प हो गया तो , महिलाओं ने सिलाई, ब्यूटीपार्लर, अचार, मसाले बनाकर परिवार का पेट भरा। आज इनके परिवारों को इन महिलाओं पर नाज हो रहा है।
अलवर जिले में अभी तक 9 हजार से स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं जिसमें 1 लाख 6 हजार महिलाएं जुडी हैं। ये महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं। इन महिलाओं को मजबूत बनाने में बैंकों का भी विशेष योगदान है। बैंकों की ओर से 1 अरब 40 करोड रुपए ऋण् दिया जा चुका हैं।
राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद जिसे की राजीविका कहा जाता है। इसकी शुरुआत सन 2014 - 15 में हुई थी। इसमें रामगढ़ व राजगढ़ ब्लॉक को ही शामिल किया गया था। लेकिन सन 2019 में इसमें जिले के सभी 14 ब्लॉक को शामिल किया गया। इसमें स्वयं सहायता समूह बनाए गए और महिलाओं को छोटी छोटी बचत करना सिखाया, उन्हें स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया गया।
हर साल बनाएं जाते हैं समूहराजीविका मिशन को सन 2022 में 2700 समूह बनाने का लक्ष्य रखा गया, इसमें से अभी तक 2500 समूह बनाए जा चुके हैं। इस साल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए 43 करोड़ का बजट दिया गया हैं इसमें से अभी तक 35 करोड रुपए खर्च किए जा चुके हैं।ज्यादा से ज्यादा महिलाएं समूहों से जुडे़ इसके लिए राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष समूह बनाने का लक्ष्य भी दिया जाता है।
ऑनलाइन व ऑफलाइन बेचे जा रहे हैं उत्पाद
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जो उत्पाद तैयार करती हैं , उनको ऑनलाइन व ऑफलाइन बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है। समूह की महिलाओं के हस्त निर्मित उत्पाद राज्य के अलग अलग जिलों में हर महिने लगने वाले सरस फेयर में भेजा जाता है, दीपावली फेयर, होली फेयर में उत्पाद की स्टॉल लगाई जाती है। जयपुर के राजस्थ्ली में लगाए गए काउंटर भी उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए हैं। अलवर में तैयार टेरीकोटा की मूर्तियां, हस्त निर्मित मोजडी, मिटटी के बर्तन, गाय के गोबर के दीपक ,की राजस्थान में ही नहीं देश में मांग है।
राजीविका स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को सशक्त बनाते हैं। अभी तक 9 हजार से ज्यादा समूह बनाए गए हैं। समूह से जुडी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है, ऋण देकर उनको सामान आर्थिक रूप से मजबूत करते हैं। कमाई होने पर महिलाएं ऋण चुका देती हैं।
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