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रमेश भाई ओझा बोले- धर्म कोई गेंद नहीं कि राजनीतिक पार्टियां खेलें, राजनीति में धर्म होना चाहिए, धर्म में राजनीति नहीं

Ramesh Bhai Ojha: श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करने अंबिकापुर पहुंचे कथा वाचक रमेश भाई ओझा ने पत्रकारों से चर्चा कर कही ये बातें, बोले- छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा का मंदिर खोलने रहेगी पूरी कोशिश

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रमेश भाई ओझा बोले- धर्म कोई गेंद नहीं कि राजनीतिक पार्टियां खेलें, राजनीति में धर्म होना चाहिए, धर्म में राजनीति नहीं

Ramesh Bhai Ojha

अंबिकापुर. Ramesh Bhai Ojha: श्रीमद भागवत कथा में अंबिकापुर पहुंचे विश्वविख्यात कथा वाचक रमेश भाई ओझा ने बुधवार को शहर के मनेंद्रगढ़ रोड स्थित रामनिवास कॉलोनी में पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरगुजा वनांचल क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जीवन शैली को प्रत्यक्ष रूप से देखने पर विशेष आनंद का अनुभव रहा। कोशिश रहेगी कि हर वर्ष इस क्षेत्र में एक कथा हो। कथा को लेकर उन्होंने कहा कि कथा गंगा की तरह है, जो अनवरत बहती हुई हृदय तक पहुंचती है।


ओझा ने कहा कि जहां भाव का बाहुल्य है उनको विचार दिया जाए और शहरी क्षेत्र में जहां विचार का प्रभाव है लेकिन वहां कभी-कभी भाव की दृष्टि से सूखापन देखने को मिलता है। जो विचारवान लोग हैं उन्हें भाव दिया जाए और भावनापूर्ण जीवन जीने वालों को विचार प्रदान किया जाए।

भाव और विचार दोनों में संतुलन स्वस्थ जीवन के लिए अनिवार्य है। विचारवान लोगों का समाज तैयार होगा तो राष्ट्र व सबको इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मानव जैसा बुद्धिमान प्राणी है उसको नियंत्रित करना आवश्यक है। धर्म कहता है कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा, हमें हिंसा नहीं करना चाहिए, बेईमानी से दूर रहना चाहिए।

जीवन में पुण्य एवं भलाई का कार्य करें। इससे समाज व सरकार दोनों को लाभ होगा। जो लोग धर्म को नहीं मानते, समाज के रीति-रिवाज को फॉलो करते हैं। कुछ लोग रीति-रिवाज को भी नहीं मानते तो उनको चलाने सरकार के पास डंडा है। ओझा ने कहा कि धर्म, समाज और सरकार ये तीनों मिलकर व्यक्ति को अच्छा इंसान बनाते हैं।

धर्म कोई गेंद नहीं कि राजनीतिक पार्टियां खेलें। राजनीति में धर्म होना चाहिए, धर्म में राजनीति नहीं। जनता व राष्ट्र के प्रति समर्पित कार्य राजनीतिक पार्टियों को करना चाहिए। पक्षीय स्वार्थ में लगे रहेंगे तो समाज व राष्ट्र का नाश होगा।

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‘अच्छे समाज के लिए एक देश एक चुनाव जरूरी’
अखंड भारत को लेकर उन्होंने कहा कि मेरी व्यक्तिगत सलाह है इस पर जल्दबाजी न करें, अन्यथा गंभीर दूरगामी परिणाम भी हो सकते हैं। हालांकि दिल्ली में समझदार लोग बैठे हैं उचित निर्णय ही लेंगे।

ओझा ने एक देश एक कानून एवं एक देश एक चुनाव का समर्थन करते हुए कहा कि यह अच्छे समाज के लिए जरूरी है। लोग साल भर चुनाव कराने में लगे रहते हैं, चुनाव प्रजातंत्र व्यवस्था में उत्सव की तरह लगना चाहिए।


बच्चों के ऊपर पढ़ाई का बहुत दबाव अनुचित
कथावाचक रमेश भाई ओझा ने कहा कि आज बच्चों के ऊपर पढ़ाई का बहुत दबाव है, हमें इसे लेकर गंभीर होना चाहिए। बच्चों को सुबह जल्दी उठाओ, स्कूल भेजो, पढ़ाओ, फटकार लगाने से बच्चों के ऊपर बहुत दबाव बन रहा है।

उन्होंने कहा कि भगवान कृष्णा 11 साल की उम्र तक स्कूल नहीं गए लेकिन वह जगतगुरु बन गए। बच्चों के ऊपर पढ़ाई बोझ बन जाएगा तो वह पढ़ेंगे नहीं। बच्चों का बचपन छीन ना जाए, पढ़ाई फन की तरह हो स्कूल कैद ना बने।

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छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा का मंदिर खोलने रहेगी पूरी कोशिश
वार्ता के दौरान कथावाचक ओझा ने बताया कि प्रारंभ से ही आदिवासी बच्चे-बच्चियों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए उन्होंने गुजरात व अन्य राज्यों में विद्या मंदिर बनवाया है और अभी भी आदिवासी बच्चे-बच्चियों के लिए काम जारी है।

छत्तीसगढ़ में भी उनके द्वारा आदिवासी बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने के प्रश्न पर कहा कि छत्तीसगढ़ में भी विद्या का मंदिर खोलने की उनकी मंशा है। वे पूरी कोशिश करेंगे कि यहां भी स्कूल खुले और यहां के आदिवासी बच्चियों को उसका लाभ मिले।

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