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डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ खड़ी हुईं पत्नी मेलानिया, विपक्ष का भी मिला साथ

पति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के उलट पत्नी मेलानिया ट्रंप ने प्रवासी बच्चों को हक दिलाने के लिए विपक्ष के सुर में सुर मिलाया है।

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Melania

डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ खड़ी हुई पत्नी मेलानिया, विपक्ष का भी मिला साथ

वाशिंगटनः अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने मेक्सिको से अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करने की नीति को समाप्त करने की अपील की है। मेलानिया की प्रवक्ता ने कहा, "मेलानिया का मानना है कि हमें ऐसा देश बनने की जरूरत है जो सभी कानूनों का पालन करे लेकिन साथ में एक ऐसा देश भी बनना होगा, जो दिल से काम करे।" मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेलानिया की यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर बढ़ते विवादों के बीच आई है। मेलानिया ट्रंप ने कहा कि वह बच्चों को अपने परिवारों से अलग होते देखना पसंद नहीं करती और उन्हें उम्मीद है कि सदन में दोनों पक्ष (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) एकजुट होकर कानून में सुधार करें।

डेमोक्रेट नेताओं ने प्रवासी बच्चों के लिए आवाज उठाई
अमरीका के डेमोक्रेट सांसदों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सांसद ने मेक्सिको सीमा पर प्रवासी बच्चों को उनके मां-बाप से अलग करने की नीति के खिलाफ अपने अभियान का विस्तार किया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कई रिपब्लिकन नेताओं की चुप्पी के खिलाफ रविवार को डेमोक्रेट सांसदों ने न्यूयॉर्क शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक सुधार केंद्र का दौरा किया और टेक्सास जाकर सुधार गृहों में रखे गए बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। बताया जा रहा है कि जिस सुधार गृह का सांसदों ने दौरा किया, वहां छह साल से कम उम्र के 100 बच्चे देखे गए। दौरा करने के बाद न्यूयॉर्क के प्रतिनिधि एड्रियानो एस्पाइलैट ने कहा,"यह अनुचित और असंवैधानिक है।

ट्रंप की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की आलोचना
हाल के छह सप्ताह की अवधि के दौरान लगभग 2,000 परिवारों को उनके बच्चों से अलग रखा गया। सीमा पार करने की कोशिश करने वाले वयस्कों को हिरासत में रखा जाता है और उन पर अमरीका में अवैध तरीके से प्रवेश करने के लिए आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। इस नीति के चलते सैकड़ों की संख्या में बच्चों को हिरासत केंद्रों में रखा जाता है और अपने परिजनों से दूर रखा जाता है, जिसकी बड़े पैमाने पर मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना भी की है।

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