जय विज्ञान : सात साल की अंतरिक्ष यात्रा के बाद ओसीरिस-रेक्स यान की वापसी सितंबर में, 1,680 लाख किलोमीटर दूर सूर्य की परिक्रमा करता है बेन्नू
ह्यूस्टन. सौर मंडल और पृथ्वी के निर्माण को समझने में एस्टेरॉयड बेन्नू का नमूना अहम भूमिका निभा सकता है। इसके सितंबर के आखिर में पृथ्वी पर पहुंचने की उम्मीद है। ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में इसका विश्लेषण किया जाएगा।
नासा ने 2016 में ओसीरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान को एस्टेरॉयड बेन्नू की यात्रा के लिए लॉन्च किया था। यह एस्टेरॉयड करीब 1,680 लाख किलोमीटर की औसत दूरी पर सूर्य की परिक्रमा करता है। सात साल की अवधि वाले इस मिशन का मकसद कम से कम 60 ग्राम नमूने लाना है। स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक नमूने मिलने के बाद वैज्ञानिक अध्ययन के लिए चट्टान और धूल के टुकड़ों को अलग करेंगे। बाकी नमूने को भविष्य की पीढिय़ों के लिए संरक्षित रखा जाएगा। अंतरिक्ष यान 24 सितंबर को यूटा में उतरेगा। यह करीब 250 ग्राम नमूना सामग्री लाएगा, जो एक कप के बराबर होगी।
जीवन निर्माण के प्रमाण होने के आसार
ओसीरिस-रेक्स के क्यूरेटर निकोल ल्यूनिंग का कहना है, ‘हमें एस्टेरॉयड बेन्नू पर कुछ भी जीवित होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन जीवन निर्माण के प्रमाण हो सकते हैं। इसी उम्मीद ने हमें इस एस्टेरॉयड पर जाने के लिए प्रेरित किया। हम समझना चाहते हैं कि वह कौन-सी खास वजह थी, जिसने पृथ्वी और हमारे सोलर सिस्टम में जीवन को बढ़ावा दिया।
अरबों साल से अंतरिक्ष में मौजूद
मिशन से जुड़े वैज्ञानिक ईव बर्जर के मुताबिक अरबों साल से अंतरिक्ष में रहने के बावजूद ये नमूने कभी हमारे वायुमंडल के संपर्क में नहीं आए। इनसे यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि हम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे में जो सोचते हैं, वह सच है या नहीं।