
विशाल एक्सोप्लेनेट पर मिले जीवन की संभावना के संकेत
फ्लोरिडा. नासा के वैज्ञानिकों ने कई प्रकाश वर्ष दूर एक विशाल एक्सोप्लेनेट पर महासागर होने का पता लगाया है। उनके मुताबिक हमारे सौरमंडल के बाहर के इस ग्रह पर संभावित जीवन की तरफ इशारा करने वाला एक रसायन भी मिला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘के2-18 बी’ नाम का यह एक्सोप्लेनेट पृथ्वी से 8.6 गुना बड़ा है। इसके वातावरण की जांच में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड समेत कार्बन के प्रभाव वाले अणुओं की उपस्थिति का पता चला है।
साइंस डेली की रिपोर्ट के मुताबिक नासा का मानना है कि यह हाइसीन एक्सोप्लेनेट हो सकता है। इस किस्म के एक्सोप्लेनेट पर हाइड्रोजन और पानी का विशाल भंडार होता है। नासा के एक वैज्ञानिक ने कहा कि इस खोज ने ब्रह्मांड के बारे में नई जानकारी दी है। यह एक्सोप्लेनेट पर जीवन की खोज की दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकती है। मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड का होना और अमोनिया की कमी इसकी पुष्टि करती है कि के2-18 बी पर हाइड्रोजन से लैस वातावरण के नीचे महासागर है।
वातावरण पर 2015 से चल रहा था अध्ययन
नासा ने 2015 में अपने के2 मिशन के दौरान हबल स्पेस टेलीस्कोप से के2-18 बी की खोज की थी। तभी से इसके वातावरण पर अध्ययन चल रहा था। इसके लिए नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद ली गई। यह एक्सोप्लेनेट पृथ्वी से 120 प्रकाश वर्ष दूर है और एक बौने तारे की परिक्रमा करता है। यह पहला मौका है, जब सौरमंडल के बाहर के किसी ग्रह पर पृथ्वी जैसा वायुमंडल होने के संकेत मिले हैं।
रहने योग्य वायुमंडल की संभावना ज्यादा
नए एक्सोप्लेनेट पर अध्ययन करने वाले कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्री निक्कू मधुसूदन ने बताया कि परंपरागत रूप से एक्सोप्लेनेट पर जीवन की खोज छोटे चट्टानी ग्रहों पर केंद्रित रही है, लेकिन बड़े हाइसीन एक्सोप्लेनेट पर रहने योग्य वायुमंडल की संभावना ज्यादा है। के2-18 बी के वायुमंडल की जानकारी ने हमें आगे और शोध के लिए प्रेरित किया है।
Published on:
13 Sept 2023 12:25 am
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