
सीरिया में चल रहे संघर्ष को विराम देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पास किया है। इसमें सभी 15 सदस्यो ने सीरिया के प्रभावित इलाकों में सहायता मुहैया कराने पर सहमति बनाई है। बता दें, रूस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इसे देखते हुए प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। इसमें 30 दिन के संघर्ष विराम के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
मुद्दे पर रूस से घंटों बातचीत चली थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया था। इसी के बाद मतदान कराने का निर्णय लिया गया। प्रस्ताव में प्रभावित इलाकों में मैडीकल सुविधा मुहैया कराने की बात भी कही गई है।
गौर हो सीरियाई सरकार ने पूर्वी घौटा में विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्र पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इसलिए 9 फरवरी से ही सुरक्षा परिषद में संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर बातचीत हो रही थी। रूस ने संघर्ष विराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसमें संशोधन की मांग की थी। रूस सीरियाई सरकार के समर्थन में है। जबकि पश्चिमी जानकारों का मानना है कि ऐसा करके रूस अपना समय बर्बाद कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूत विताली चुर्किन का कहना है कि जब तक संघर्ष में शामिल दोनों पक्ष राजी नहीं होते, तब तक संषर्घ विराम का पालन संभव ही नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की प्रतिनिधि निकी हैली का भी कहना है कि हालांकि इस पर संदेह है कि सीरिया संषर्ष विराम पर राजी होगा या नहीं, इसके बावजूद संषर्घ विराम को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
बता दें, शनिवार देर रात को भी पूर्वी घौता में हमला हुआ। इसमें अब तक 500 मौतें होने की बात कही गई है। यह जानकारी ब्रिटेन स्थित समूह ऑब्जरवेटरी फॉर ह्यूमन राइट के हवाले से सामने आई है।
सीरिया में सहायता पहुंचाने वाले संगठनों के कार्यकर्ताओं का मानना है कि सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास 2013 के बाद हुए हमलों में यह हमला सबसे ज्यादा हिंसक है।
Published on:
25 Feb 2018 12:31 pm
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