आगरा

World Breastfeeding Week: फीडिंग से कम होता ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट संबन्धी समस्याओं का खतरा

World Breastfeeding Week (1-7 August) कई शोध में ये बात सामने आ चुकी है कि ब्रेस्टफीडिंग मां की सेहत के लिहाज से भी जरूरी है।

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Aug 02, 2018
World Breastfeeding Week

आगरा। विश्व स्तनपान सप्ताह 1 अगस्त से शुरू हो चुका है जो 7 अगस्त तक चलेगा। इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य नई मांओं को ब्रेस्टफीडिंग के प्रति जागरूक करना है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल की मानें तो फीडिंग का लाभ सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि मांओं को भी होता है। डॉ. रश्मि गोयल से जानते हैं इसके बारे में।

कैंसर और हार्ट की बीमारियों का खतरा टालती
डॉ. रश्मि गोयल बताती हैं कि सिर्फ बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि खुद की सेहत के लिए भी ब्रेस्टफीडिंग जरूर करवाएं। कई शोध बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग से हार्ट संबंधी तमाम समस्याओं, ब्रेस्ट कैंसर और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद का मोटापा भी छंटता है।

बच्चे को निमोनिया डायरिया से बचाता है
बच्चे को जन्म छह माह तक पानी या कोई अन्य चीज नहीं देना चाहिए। सिर्फ मां का दूध ही सर्वोत्तम है। इसे पीने से बच्चे का निमोनिया, डायरिया जैसी तमाम बीमारियों से बचाव होता है। छह महीने बाद बच्चे को हल्का आहार दे सकते हैं। लेकिन फीडिंग कम से कम एक साल से दो साल तक जारी रखें।

शारीरिक व मानसिक रूप से करता विकसित
मां के दूध में तमाम मिनरल्स होते हैं। इससे बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास होता है।

24 घंटे में कम से कम 8 से 12 बार कराएं फीड
छह माह तक बच्चा सिर्फ मां के दूध पर आश्रित होता है, ऐसे में उसे जब जरूरत हो दूध जरूर पिलाएं। एक अनुमान के मुताबिक माना जाता है कि आमतौर पर बच्चे को 24 घंटे में कम से कम 8 से 12 बार फीड कराने से उसके शरीर की जरूरत पूरी हो जाती है। लेकिन प्रत्येक बार स्तनपान कम से कम 10 से 20 मिनट तक कराना चाहिए। यदि बच्चा 6 से 7 बार यूरिन, 2 बार फ्रेश हो रहा है, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसे पर्याप्त मात्रा में पोषण मिल रहा है और उसकी ग्रोथ ठीक हो रही है।

Published on:
02 Aug 2018 09:30 am
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