
आगरा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आह्वान था। जिसमें जमकर बवाल हुआ। आगरा में एक दिन में करीब पचास करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब सोशल मीडिया पर दस अप्रैल को भारत बंद की चर्चाएं जोर शोर से चल रही हैं। भारत बंद बुलाने पर अब व्यापारियों में दहशत का माहौल देखा जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि वे अपने प्रतिष्ठान स्वत: ही बंद कर देंगे। नुकसान नहीं सहेंगे।
कारोबारी पहले की आर्थिक तंगी से जूझ रहा
दलितों के भारत बंद के जवाब में सवर्ण संगठनों ने कोर्ट के फैसले के समर्थन में दस अप्रैल को भारत-बंद की घोषणा कर दी है। सोशल मीडिया पर रोजाना इस बंद को लेकर तरह तरह के प्रचार किए जा रहे हैं। व्यापार की दृष्टि से आगरा के कारोबारियों का कहना है कि पहले ही नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों के कारण कारोबारी भारी दबाव में है। कई कारोबारी आर्थिक तंगी व मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या तक कर चुके हैं। वहीं आज भी आर्थिक संकटों से कारोबारी जूझ रहे हैं। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान उपद्रवियों ने कारोबारियों की दुकानों को टारगेट किया था, जिसमें उन्हें बड़ा नुकसान हुआ था। कारोबारी अब इस स्थिति में नहीं है कि दोबारा नुकसान सहन कर सकें। आगरा के होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाधवा का कहना है कि बंद के चलते पर्यटन पर भारी असर देखने को मिला। आगरा की छवि खराब हुई। कारोबारियों को प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। किसी भी राजनीतिक दल, समूह या संगठन के बंद के आह्वान पर अब स्वत: ही प्रतष्ठिानों को बंद कर देंगे। कोई भी व्यवसायी दंगाइयों और उपद्रवियों को इतना अवसर नहीं देगा कि लूट और आगजनी जैसे मंसूबों को पूरा कर सकें।
केवल सोशल मीडिया पर चल रहा भारत बंद
केवल सोशल मीडिया पर दस अप्रैल के भारत बंद का प्रचार हो रहा है। अभी तक केंद्र या प्रदेश स्तर पर किसी बड़े संगठन ने दस अप्रैल के बंद का ऐलान या समर्थन नहीं किया है। इस कारण अभी व्यापारी वर्ग असमंजस में है।