आगरा

Hariyali Teej 2018 : जानिए हरियाली तीज की व्रत कथा

Sawan Hariyali Teej 2018 Katha : हरियाली तीज पर पूजन और व्रत का विधान है, पढ़िए हरियाली तीज के दिन पूजन के दौरान पढ़ी जाने वाली व्रत कथा।
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Updated: 13 Aug 2018, 12:48 PM IST
hariyali teej
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13 अगस्त को Hariyali teej है। हरियाली तीज पर पूजन और व्रत का विधान है। पूजन के दौरान शिव पार्वती की कथा पढ़ी जाती है। यहां जानिए क्या है तीज की व्रत कथा।

शिवजी कहते हैं, 'हे पार्वती! बहुत समय पहले तुमने अन्न जल त्यागकर मेरे लिए हिमालय पर तप किया था ताकि तुम मुझे वर के रूप में पा सको। उस दौरान तुम सूखे पत्ते चबाकर दिन बिताती थीं। उस समय तुम्हारे सामने कई तरह की चुनौतियां आयीं लेकिन तुमने किसी बात की परवाह नहीं की। तुम्हारा ये हाल देखकर तुम्हारे पिता भी बहुत दुखी थे और मन ही मन तुमसे नाराज थे। ऐसी स्थिति में नारदजी तुम्हारे घर पधारे।

जब तुम्हारे पिता ने उनसे आगमन का कारण पूछा तो नारदजी बोले- 'हे गिरिराज! मुझे भगवान विष्णु ने आपके पास भेजा है। वे आपकी कन्या पार्वती से विवाह करना चाहते हैं। ये सुनकार गिरिराज बहुत प्रसन्न हुए और बोले इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है कि इस संसार के पालनकर्ता स्वयं मेरी बेटी से विवाह करना चाहते हैं। उन्होंने फौरन इस विवाह के लिए स्वीकृति दे दी।

शिवजी पार्वती जी से कहते हैं, कि इसके बाद नारद जी ने ये शुभ समाचार भगवान विष्णु को सुनाया। लेकिन जब तुम्हे इस बात की खबर हुई तो तुम बहुत दुखी और नाराज हुईं क्योंकि तुमने तो मुझे पहले ही अपना पति मान लिया था। अपने मन को हल्का करने के लिए तुमने ये बात अपनी सहेली को बताई। इसके बाद तुम्हारी सहेली ने तुम्हें एक घनघोर वन में शिव को प्राप्त करने के लिए साधना करने की बात कही। तुमने बिल्कुल ऐसा ही किया। जब गिरिराज को तुम्हारे अचानक गुम होने की सूचना मिली तो उन्होंने तुम्हारी खोज में धरती-पाताल एक करवा दिए लेकिन तुम नहीं मिलीं।

तुम तो वन में एक गुफा के अंदर मेरी आराधना में लीन थीं। वो दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया का दिन था जब तुमने रेत से मेरी शिवलिंग बनाई और मेरी आराधना की। उसके बाद प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर मनोकामना को पूर्ण किया। इसके बाद तुमने अपने पिता के समक्ष एक शर्त रख दी कि मैं आपके साथ तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह महादेव के साथ करेंगे। हारकर पर्वतराज को तुम्हारी हठ माननी पड़ी और वे तुम्हें घर वापस ले गए। कुछ समय बाद उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ हमारा विवाह किया।

भगवान् शिव ने कहा, 'हे पार्वती! श्रावण शुक्ल तृतीया हमारे मिलन का दिन है। इस दिन तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था, उसी के परिणाम स्वरूप हम दोनों का विवाह संभव हो सका। आज के बाद जो भी स्त्री इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करेगी उसे मैं मन वांछित फल दूंगा। उस स्त्री को तुम्हारी तरह अचल सुहाग प्राप्त होगा।

Updated on:
13 Aug 2018, 12:48 PM IST
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