
निजी वेयर हाउस में मिली सरकारी दवाएं, pc- CHATGPT
आगरा। उत्तर प्रदेश में एक बड़ी दवा घोटाले का खुलासा हुआ है। सरकारी अस्पतालों, सेना, ईएसआई और केंद्र सरकार को सप्लाई के लिए निर्धारित दवाएं निजी गोदामों में पाई गई हैं। आगरा, अलीगढ़ और उत्तराखंड के रुड़की से मिले सुरागों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया है।
एफएसडीए की टीम ने आगरा में फव्वारा इलाके के झूलेलाल बाजार स्थित एक अवैध गोदाम पर छापा मारा। तीन दिन की गहन पड़ताल के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गोदाम से जब्त दवाओं में एंटीबायोटिक, डायबिटीज (इंसुलिन), थायरॉइड, हृदय रोग और पेट संबंधी दवाएं शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक है। दूसरे गोदाम समेत कुल जब्ती ढाई करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
जांच में पता चला कि दवाओं के पैकेट पर मूल मूल्य मिटाकर फिजिशियन सैंपल लिख दिया जाता था। इसके बाद इन्हें सस्ती दर पर झोलाछाप डॉक्टरों और छोटे मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया जाता था। हर जिले के लिए अलग-अलग सेल्समैन तैनात थे।
सबसे गंभीर बात यह है कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन की दवाओं के साथ भी गड़बड़ी की गई। अस्पतालों के लिए भेजी जा रही अच्छी दवाओं के पैकेट रास्ते में बदल दिए जाते थे। घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं सरकारी अस्पताल पहुंचाई जाती थीं, जबकि मूल कंपनी की दवाएं निजी गोदामों में डायवर्ट कर दी जाती थीं।
टीम को यह भी पता चला कि एक्सपायर हो चुकी इंसुलिन इकट्ठा की जाती थी। उस पर पुरानी एक्सपायरी डेट मिटाकर नई तारीख छाप दी जाती थी। फिर इन दवाओं को ग्रामीण इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर भेजा जाता था। इसी तरह रेबीज के इंजेक्शन के साथ भी हेराफेरी की गई।
आगरा के ज्योति ड्रग हाउस के संचालक नारायण दास हंसराजानी के अवैध गोदाम से 30 फार्मा कंपनियों की 150 से ज्यादा सैंपल दवाएं बरामद हुई हैं। विभाग ने सभी कंपनियों को नोटिस जारी कर दवाओं का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। दोनों अवैध गोदाम सील कर दिए गए हैं।
कोतवाली पुलिस ने नारायण दास हंसराजानी के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। गोदाम में काम करने वाले पुनीत कटारा और भवन मालिकिन मोहिनी हीरानी से भी पूछताछ की जा रही है।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक डॉ. उज्जवल कुमार ने बताया कि उनका कार्पोरेशन केवल वेयरहाउस तक दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी लेता है। इसके बाद जिला स्तर पर वितरण होता है। एफएसडीए से अभी तक आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पूरी रिपोर्ट मंगाकर जांच कराई जाएगी।
एफएसडीए की टीम जिलेवार रिपोर्ट तैयार कर रही है। पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
Updated on:
25 May 2026 11:39 am
Published on:
25 May 2026 11:39 am
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