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आगरा में जिप लाइन से गिरकर 15 साल के बच्चे की मौत, बेल्ट खुली और धड़ाम,VIDEO

Agra zipline accident : आगरा की प्रसिद्ध चौपाटी पर जिप लाइन झूलते समय 45 फीट की ऊंचाई से गिरकर फिरोजाबाद के 15 वर्षीय कुणाल की दर्दनाक मौत। सुरक्षा बेल्ट खुलने से हुआ यह बड़ा हादसा, संचालक और मैनेजर हिरासत में।

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Agra Accident

आगरा में जिप लाइन से गिरकर 15 साल के बच्चे की मौत, PC- @Sachingupta

आगरा(Agra zipline accident) :आगरा में एक दर्दनाक हादसा हो गया। फिरोजाबाद के 15 वर्षीय कुणाल अग्रवाल अपनी माता-पिता और छोटे भाई के साथ आगरा घूमने आए थे। ताजगंज स्थित प्रसिद्ध आगरा चौपाटी पर बच्चों के मनोरंजन के लिए परिवार पहुंचा। वहां 120 मीटर लंबी और 45 फीट ऊंची जिप लाइन देखकर कुणाल का मन ललचा गया। उसने जिद की कि वह भी झूलेगा।

माता-पिता ने बेटे की खुशी के लिए टिकट खरीद लिया। कुणाल सुरक्षा बेल्ट बंधवाकर पुली के सहारे आगे बढ़ा। महज 10 मीटर ही चला होगा कि अचानक उसकी जोरदार चीख गूंजी। सुरक्षा बेल्ट खुल गई और कुणाल 45 फीट की ऊंचाई से सीधा कंक्रीट के फर्श पर गिर पड़ा।

मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। परिजनों की चीखें गूंजने लगीं। लोगों ने तुरंत कुणाल को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक पल में पूरा परिवार टूट गया।

'बेटा बस इतना ही देखना चाहता था…'

कुणाल के पिता पंकज अग्रवाल गांधी नगर, फिरोजाबाद निवासी हैं। परिवार रविवार शाम घूमने के मूड में आगरा आया था। छोटे भाई के साथ कुणाल चौपाटी पर बहुत उत्साहित था। जिप लाइन पर दूसरे बच्चों को झूलते देखकर वह भी उतावला हो गया। माता-पिता ने सोचा होगा कि बेटे को एक अच्छी याद मिल जाएगी, लेकिन यह याद बन गई आखिरी और सबसे दर्दनाक याद। हादसा रविवार शाम करीब 6 बजे का बताया जा रहा है।

पुलिस ने तुरंत बंद करवाया जिप लाइन का संचालन

एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। जिप लाइन का संचालन तुरंत बंद करवा दिया गया। जिन लोगों ने टिकट खरीदे थे, उनके पैसे मौके पर वापस कर दिए गए।

पुलिस ने जिप लाइन संचालक और चौपाटी मैनेजर को हिरासत में ले लिया है। दोनों से पूछताछ जारी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

जिप लाइन जैसी एडवेंचर गतिविधियों के लिए हेलमेट समेत कड़े सुरक्षा मानक तय हैं। लेकिन इस हादसे ने चौपाटी प्रशासन और ऐसे झूलों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बेल्ट ठीक से चेक की गई थी? क्या स्टाफ प्रशिक्षित था? क्या ऊंचाई पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय थे?

परिवार अब कुणाल का इंतजार करते हुए खाली हाथ लौट रहा है। एक मासूम की जिद और माता-पिता की लाडली खुशी, महज कुछ सेकंड में हमेशा के लिए खत्म हो गई।

प्रशासन से अपील की जा रही है कि ऐसे सभी एडवेंचर स्पॉट्स की तुरंत जांच हो और बच्चों व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले।