प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म चाय-कॉफी पीना भारी पड़ सकता है। आगरा मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। इससे BPA बढ़ा रहा है।
आगरा में हुई एक मेडिकल स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। गर्म खाना, चाय या कॉफी को प्लास्टिक के डिब्बों और कप में रखने से निकलने वाला बिस्फेनॉल-ए (BPA) गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। यह केमिकल शरीर में पहुंचकर गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज) का जोखिम बढ़ा रहा है। जिससे मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ सकता है।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में की गई एक स्टडी में सामने आया है कि प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना या पेय पदार्थ लेने से गर्भवती महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस रिसर्च में पाया गया कि प्लास्टिक से निकलने वाला बिस्फेनॉल-ए (BPA) नाम का केमिकल गर्भावस्था में डायबिटीज की बीमारी को बढ़ावा दे रहा है। यह अध्ययन अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के बीच किया गया। जिसमें 186 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया। इस रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि गर्भावस्था में डायबिटीज यानी जेस्टेशनल डायबिटीज किन कारणों से हो रही है। जांच के दौरान सभी महिलाओं का शुगर लेवल चेक किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 83 महिलाओं का शुगर लेवल सामान्य पाया गया। जबकि 83 महिलाओं में शुगर का स्तर 160 से 200 के बीच था। जो जेस्टेशनल डायबिटीज की स्थिति को दर्शाता है। खास बात यह रही कि इन महिलाओं को गर्भधारण से पहले डायबिटीज की कोई समस्या नहीं थी। स्टडी के दौरान सभी महिलाओं के शरीर में बिस्फेनॉल-ए की मात्रा जानने के लिए यूरिन टेस्ट भी किया गया। इसमें पाया गया कि जिन महिलाओं का शुगर लेवल सामान्य था, उनके शरीर में BPA की मात्रा कम थी। जबकि डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में यह स्तर काफी ज्यादा पाया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, बिस्फेनॉल-ए का इस्तेमाल प्लास्टिक को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। जब गर्म खाना या पेय पदार्थ प्लास्टिक के कंटेनर में रखा जाता है। तो यह केमिकल उसमें घुलकर खाने-पीने की चीजों में मिल जाता है। इसके बाद यह शरीर में पहुंचकर इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा सेल्स) को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था में डायबिटीज होना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस दौरान दवाइयों की बजाय अक्सर इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि गर्भवती महिलाओं को प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना या चाय-कॉफी लेने से बचना चाहिए। इसके बजाय कांच, स्टील या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। यह स्टडी एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में सामने आई है, जो लोगों को रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाने के लिए जागरूक करती है।