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ताजमहल और आगरा किला के पास 3913 अवैध निर्माण, 10 साल में न किसी को सजा मिली न जुर्माना

Agra Monuments Illegal Construction: आगरा के ऐतिहासिक स्मारकों के पास 3,913 अवैध निर्माण, पर 10 साल में कोई कार्रवाई नहीं। ताजमहल और आगरा किला के आसपास बढ़ते अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त।

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आगरा

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Pratiksha Gupta

Apr 06, 2026

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आगरा अतिक्रमण | (फोटो सोर्स- gemini)

Agra Monuments Illegal Construction: दुनिया भर में मशहूर ताजमहल और आगरा किला सहित आगरा के 154 ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 सालों में 3,913 अवैध निर्माण हुए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामला सामने आने पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है।

सिर्फ एफआईआर दर्ज, कोई ठोस एक्शन नहीं

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 10 सालों में अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एएसआई ने एफआईआर दर्ज कराकर सिर्फ औपचारिकता कर ली। इतने सालों में न तो किसी अतिक्रमणकारी पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया और न ही किसी पर कानूनी शिकंजा कसा जा सका। यही वजह है कि अवैध कब्जों का सिलसिला लगातार जारी है।

इन जगहों पर सबसे ज्यादा असर

  • ताजमहल: इसके पूर्वी गेट से लेकर असद गली तक लगातार नए अवैध निर्माण हो रहे हैं।
  • आगरा किला: इसके 200 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में नियमों को तोड़कर निर्माण किए जा रहे हैं।
  • फतेहपुर सीकरी: यहां के सुरक्षित क्षेत्रों (जैसे हिरन मीनार के पास) में भी बड़े पैमाने पर कब्जा हो चुका है।
  • मकबरों के पास: पिछले तीन महीनों में अकबर और मरियम के मकबरों के पास 100 से ज्यादा एफआईआर हुई हैं, फिर भी निर्माण नहीं रुक रहे।

अफसरों पर डेटा छुपाने का आरोप

विरासत बचाने के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि एएसआई के आंकड़े भ्रामक हैं। सितंबर 2023 और अप्रैल 2025 दोनों समय के आंकड़े 3,913 ही दिखाए गए हैं। आरोप है कि विभाग नए अतिक्रमणों की जानकारी छुपा रहा है।

हाईकोर्ट की फटकार और सुस्त सिस्टम

साल 2010-11 में नियमों में संशोधन कर साइट प्लान और गाइडलाइंस बनाने की बात कही गई थी, जो 15 साल बाद भी फाइलों में दबी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल विरासतों को खतरा है, बल्कि दुनिया भर में भारत की छवि भी खराब हो रही है।

प्रशासन का पक्ष

एक अधिकारी ने बताया कि विभाग केवल एफआईआर दर्ज करवा सकता है। निर्माण गिराने या कार्रवाई करने का अधिकार स्थानीय प्रशासन और विकास प्राधिकरण के पास है।