पूरन डावर ने कहते हैं- जो भी प्रथाएं बनी हुई हैं, उसके पीछे कुछ न कुछ सोच है।
आगरा।आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैम्बर (एफमैक) के अध्यक्ष और प्रमुख जूता निर्यातक पूरन डावर ने दहेज को अच्छी प्रथा बताया है। दहेज की मांग करके इसे कुप्रथा बना दिया गया है।
ये हैं तर्क
पूरन डावर ने कहते हैं- जो भी प्रथाएं बनी हुई हैं, उसके पीछे कुछ न कुछ सोच है। ये वैज्ञानिक हैं और सामाजिक दृष्टि से भी उचित हैं। पूर्वजों की संपत्ति पर लड़का और लड़की का बराबर का हक है। जब लड़की की शादी होती है, तो उसके पिता या भाइयों के पास जो संपत्ति है, उसमें अगर बेटी हिस्सा मांगती है तो संपत्ति या बिजनेस को बेचना पड़ेगा। इसे बेचा नहीं जा सकता है, क्योंकि बेचेगा तो स्वयं भी खत्म हो जाएगा। इसलिए बेटी की शादी के समय पिता अपनी शक्ति के अनुसार खर्च करता है। जब बेटी घर चली जाती है, तो उसके बच्चे होने पर कुछ न कुछ देता रहता है। जब पिता चला जाता है तो लड़की का भाई मामा के रूप में भात देता है। इस तरह लड़की को तीन हिस्सों में हिस्सा दिया जाता है- सीधे दहेज के रूप में, दूसरा विभिन्न अवसरों पर तथा तीसरा संतान की शादी होने पर भात के रूप में। उन्होंने कहा कि जब हम दहेज की मांग करने लगते हैं तो यह कुप्रथा हो जाती है।
दहेज के लिए अत्याचार
बता दें कि दहेज के कारण लड़कियों का विवाह करना मुश्किल हो रहा है। शादी के दौरान खुलकर दहेज की मांग की जाती है। शादी के बाद भी दहेज मांगने का क्रम जारी रहता है। दहेज के लिए बहू पर अत्याचार किए जाते हैं। दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिताओं को जलाकर या फांसी देकर मार दिया जाता है। इसके बाद पूरा परिवार जेल जाता है। इसके बाद भी लोग सबक नहीं लेते हैं। हालांकि युवा पीढ़ी में दहेज की मुखालफत है। देखा गया है कि प्रेम विवाह में दहेज नहीं चलता है।