मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने इस पर किया है अध्ययन।
आगरा। पंजाब नेशनल बैंक को 11 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले नीरव मोदी के कारण गुजरात एक बार फिर से चर्चा में है। हर्षद मेहता गुजरात का ही था। आखिर गुजरात के लोग आर्थिक अपराध क्यों करते हैं? इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में जघन्य अपराध होते हैं। जरा सी बात पर लोग हत्या तक कर देते हैं। आखिर उत्तर प्रदेश में हत्या, लूट, डकैती, रेप जैसे अपराध क्यों? इन सवालों का जवाब दिया है मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने। पत्रिका से बातचीत में डॉ. राठौर ने बताया कि उन्होंने दोनों राज्यों की मानसिक स्थिति का अध्ययन किया है। इसके आधार पर सवाल का जवाब तलाशा जा सकता है।
पहले गुजरात की बात
डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि उन्होंने सूरत मेडिकल कॉलेज से अध्ययन किया है, जो गुजरात की आर्थिक राजधानी है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) के महासचिव रहे हैं। एक आंदोलन के दौरान पूरे गुजरात के जूनियर डॉक्टर्स को जोड़ा था। 10 साल के अध्ययन में पाया है कि गुजरात में वित्तीय अपराध अधिक होते हैं। गुजरात का हर व्यक्ति हर घटना को मुनाफा और नुकसान के तराजू में तौलता है। गुजरात का व्यक्ति बचपन से ही धंधा देखता है। उसकी मानसिक अवस्था लाभ और हानि ही देखती है। अगर आप गुजरात में हैं और किसी गुजराती को कार से टक्कर मार दें, तो वो वह प्रायः आपसे उलझेगा नहीं। हां, आपको नोटिस आदि भेजकर पैसे ऐंठने का प्रयास करेगा। गुजरात में हीरा आय़ात- निर्यात पर सरकार अनुदान देती है। गुजराती दो कंपनियां बनाते हैं। हीरे का आयात निर्यात दिखाकर अनुदान हड़प कर जाते हैं। यह भी देखने में आया है कि अपनी ही जमीन पर अधबनी फैक्ट्री का अनुदान प्राप्त कर लेते हैं। फिर अचानक ही फैक्ट्री में आग लग जाती है और फिर से मुआवजा मिल जाता है। गुजरात में महिला रात के दो बजे स्टेशन से अपने घर टेम्पो में जा सकते हैं। उससे कोई कुछ नहीं कहेगा। गुजराती जानता है कि महिला के साथ अपराध से पैसे नहीं मिलने वाले। नीरव मोदी का सूरत में 3500 करोड़ रुपये का साम्राज्य है। नीरव मोदी का परिवार मूलरूप से गुजरात के बांसकाठा जिले के पालनपुर का रहने वाला है। इस समय उनका पता दिल्ली का है।
अब उत्तर प्रदेश की बात
उत्तर प्रदेश और बिहार में इसके विपरीत स्थिति है। यहां के लोगों की मानसिक दशा इस तरह की है कि जघन्य अपराध करके ही चैन मिलता है। यहां किसी से गाड़ी टकरा जाए तो मारपीट हो ही जाएगी। बात और बढ़ गई तो गोली मार दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के लोग भी पैसा कमाना चाहते हैं, लेकिन अपराध करके। धंधा करने की ओर ध्यान नहीं है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में वित्तीय अपराध बहुत कम हैं, अगर हैं भी तो छोटे स्तर के। उत्तर प्रदेश का व्यापारी इसी में खुश हो जाता है कि उसने बिल नहीं काटा और टैक्स बचा लिया। बड़े मुनाफा की ओर वह सोचता ही नहीं है।
लालच की प्रवृत्ति कराती है घोटाला
उन्होंने बताया कि हमारा दिमाग विचारों की फैक्ट्री है। हर काम के लिए दिमाग से ही निर्देश मिलता है। कुछ लोग संभल जाते हैं तो कुछ लोग नहीं। नीरव मोदी ने जो अपराध किया है, वह लालच की पराकाष्ठा है। लालच की प्रवृत्ति ही घोटाला कराती है। किसी एक घोटाले में सफलता मिल जाती है, तो फिर लत लग जाती है। यह ठीक उसी तरह से है जैसे जुआ और शराब की लत लग जाना। व्यक्ति को आनंद की अनुभूति होने लगती है। नीरव मोदी ने योजनाबद्ध ढंग से काम किया है, इसलिए इसका मानसिक विकार से कोई लेना-देना नहीं है। मानव का बच्चा सबसे कमजोर होता है। डेढ़ साल में चलना शुरू करता है। इसलिए बचपन से ही असुरक्षा की भावना रहती है। इसी असुरक्षा को सुरक्षा में बदलने के लिए संसाधन एकत्रित करने की प्रवृत्ति पैदा होती है। छोटी सोच वाला बिल न काटकर संतुष्ट हो जाता है और गुजरात का नीरव मोदी बैंक घोटाला कर देता है।