
प्रभास पाटण. श्रावण महीने में इस साल देश के प्रथम ज्योर्तिलिंग सोमनाथ महादेव के दर्शन को 22.61 लाख भक्त पहुंचे। सोमनाथ में 13 अगस्त से 11 सितंबर तक श्रावण महोत्सव-2026 मनाया गया।
श्रावण पूर्णिमा, चारों सोमवार, जन्माष्टमी, सातम-आठम, एकादशी, मासिक शिवरात्रि और अमावस्या सहित विभिन्न पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचे। जन्माष्टमी पर श्रावण की सर्वाधिक 1,72,755 श्रद्धालुओं की भीड़ दर्ज की गई। जन्माष्टमी अवकाश के दौरान 4 से 7 सितंबर तक 6,49,451 श्रद्धालुओं ने सोमनाथ महादेव के दर्शन किए।
सोमनाथ मंदिर की दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं के तहत विशेष स्टाफ और स्वयंसेवकों की मदद से वरिष्ठ नागरिकों को गोल्फ कार्ट, अटेंडेंट और व्हीलचेयर सुविधाओं की जानकारी देकर उनका लाभ दिलाया गया। 21 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराए गए।
श्रावण मास के दौरान सोमनाथ मंदिर में पिछले 75 वर्षों में अब तक सर्वाधिक 1109 ध्वजा पूजा की गई। इसमें जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, सोमेश्वर पूजा कराने वाले ब्राह्मण, सफाईकर्मी, ट्रस्ट कर्मचारी और अन्य श्रद्धालु सहभागी बने। 1,394 सोमेश्वर महापूजा और 8,775 रुद्राभिषेक पाठ हुए। श्रद्धालुओं ने 4,031 गंगाजल अभिषेक और 2,919 ब्राह्मण भोज भी करवाए।
श्री सोमनाथ ट्रस्ट की ओर से पहली बार 30 दिवसीय 51 कुंडीय महामृत्युंजय यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके लिए गिर सोमनाथ जिले के गोपालकों और ग्रामीण श्रद्धालुओं से करीब 19,700 कंडे दान के रूप में एकत्र किए गए। श्रावण मास में सोमनाथ महादेव के सानिध्य में 11.17 लाख से अधिक यज्ञ आहुतियां अर्पित की गईं, जिसे इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बताया गया।
ट्रस्ट के पूजा-विधि केंद्रों पर श्रद्धालुओं द्वारा दर्ज कराई गई पूजा सहित कुल 43.43 लाख महामृत्युंजय जाप और 38 लाख संपुट महामृत्युंजय जाप किए गए।।
4.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद
श्री सोमनाथ ट्रस्ट के नि:शुल्क भोजनालय एवं भंडारे तथा स्थानीय सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित भंडारों में 4.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
श्री सोमनाथ ट्रस्ट, गुजरात पर्यटन और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘वंदे सोमनाथ’ कला महोत्सव का इस साल दूसरा वर्ष था। आयोजन को सोमनाथ की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यक्रम के माध्यम से सोमनाथ की सदियों पुरानी नृत्य आराधना परंपरा को फिर से सामने लाने का प्रयास किया गया।