Ahmedabad. गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम ने कस्टम क्लियरेंस के फर्जी कागजात बनाकर फर्जी लेबलिंग और डिक्लरेशन कर विदेशों में एटोमिडेट नाम का एनालजेसिक ड्रग (नशीली दवा) एयर कार्गो के जरिए भेजने के एक रैकेट का पर्दाफाश किया। पहली बार ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ है। मुंबई एयरपोर्ट पर एयर कार्गो के मलेशिया […]
Ahmedabad. गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम ने कस्टम क्लियरेंस के फर्जी कागजात बनाकर फर्जी लेबलिंग और डिक्लरेशन कर विदेशों में एटोमिडेट नाम का एनालजेसिक ड्रग (नशीली दवा) एयर कार्गो के जरिए भेजने के एक रैकेट का पर्दाफाश किया।
पहली बार ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ है। मुंबई एयरपोर्ट पर एयर कार्गो के मलेशिया जाने वाले पार्सल को जब्त करते हुए सूरत में दबिश देकर एटीएस टीम ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। दो अन्य आरोपी की लिप्तता भी सामने आई है, जिससे उन्हें भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही इन दोनों की भी गिरफ्तारी संभव है।
एटीएस के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सिद्धार्थ ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि गिरफ्तार आरोपी निकुंज गढिया (28) है जो सूरत के कतारगाम क्षेत्र में रहता है। इस मामले में दो और आरोपियों -सूरत के मोटा वराछा निवासी चेतक वावडिया (28) और अमरोली के भौतिक पदमणी (32) की लिप्तता भी सामने आई है, उनसे पूछताछ की जा रही है। इनके विरुद्ध शुक्रवार को एटीएस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एसपी सिद्धार्थ ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि मलेशिया, थाईलैंड समेत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ (नशीली दवा) को गुजरात के कुछ लोग एलोविरा पाउडर बताकर उन देशों में भेज रहे हैं। इसमें खुद दवा उद्यमी-विक्रेता शामिल हैं। इसमें डीडब्ल्यूएन बायोसाइंस, न्यूट्रल फार्मा तथा ओम हर्ब्स नाम से दवाओं का व्यापार करने वाला निकुंज, जानी फार्मा का भौतिक पदमणी और रुद्र एंटरप्राइडज का चेतन वावडिया शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ये एटोमिडेट नाम की एनालजेसिक ड्रग को एलोविरा पाउडर बताकर मलेशिया व थाईलैंड भेजते थे। यह दवा भारत में बेहोशी व मेडिकल उपचार में चिकित्सक की प्रिस्क्रप्शन पर दी जाती है।
यह इतनी खतरनाक है कि इसका डोज ज्यादा हो तो जान जाने का भी खतरा होता है। यह ड्रग्स भारत में तो प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन थाइलैंड में यह साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस एक्ट, शिड्यूल-2 प्रकार के सब्स्टेंस में आता है, जबकि मलेशिया में यह पोइजन एक्ट के तहत ग्रुप बी प्रकार के ड्रग में आता है। सिंगापुर में भी इसे मिसयूज ड्रग्स एक्ट के तहत क्लास सी में रखा गया है। निकुंज ने अभी ही पार्सल मलेशिया भेजा है, जिससे मुंबई कस्टम से संपर्क कर इस पार्सल को रोका और जांच की तो इसमें विदेश में प्रतिबंधित एटोमिडेट पाउडर मिला। इसके चलते निकुंज को पकड़ा गया।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि निकुंज, भौतिक व चेतन इंडिया मार्ट वेबसाइट के जरिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल से जुड़े चुआ जी जुआन और उसके साथियों से व्यापार के चलते संपर्क में थे। जुआन ने इन्हें फर्जी लेबल, दस्तावेज के जरिए पार्सल से ड्रग्स को भेजने के लिए कहा, जिससे निकुंज और चेतन ने 50-50 किलो और भौतिक ने 25 किलो एटोमिडेट पाउडर को एलोविरा, कार्बोमोर बताकर मलेशिया व थाइलैंड भेजा था। ये एयर कार्गो के जरिए भेजते थे। जिस एटोमिडेट पाउडर को यह भेजते थे, उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत प्रति किलो चार से पांच हजार डॉलर है। इसमें से कुछ हिस्से को थाईलैंड पुलिस ने जब्त भी किया है।
एसपी ने बताया कि विदेशों में एटोमिडेट ड्रग का नशे के लिए इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसे देखते हुए थाईलैंड,मलेशिया, सिंगापुर जैसे देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है।