Ahmedabad. शहर के स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल भेज कर आतंक का माहौल पैदा करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी सौरव बिस्वास (30) पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि मूलरूप से बांग्लादेश के ढाका का रहने वाला है। इसका असली नाम माइकल बिस्वास है। ये करीब चार साल से (2021) अवैध रूप से घुसपैठ कर पश्चिम […]
Ahmedabad. शहर के स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल भेज कर आतंक का माहौल पैदा करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी सौरव बिस्वास (30) पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि मूलरूप से बांग्लादेश के ढाका का रहने वाला है। इसका असली नाम माइकल बिस्वास है। ये करीब चार साल से (2021) अवैध रूप से घुसपैठ कर पश्चिम बंगाल में घुसा था और नॉर्थ 24 परगना जिले के श्रीपल्ली बाजार गोबिंद पल्ली में रह रहा था। कंप्यूटर की क्लासेज व साइबर कैफे चला रहा था। छह और राज्यों को इसकी तलाश है, इसमें खुद पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र ,असम, और उत्तरप्रदेश शामिल हैं।
गुरुवार को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के जेसीपी शरद सिंघल ने संवाददाताओं को बताया कि आरोपी की स्कूलों को धमकी भरे मेल भेजने में ही नहीं बल्कि मेट्रो ट्रेन, कोर्ट को धमकी भरे ई-मेल भेजने के मामले में भी लिप्तता सामने आई है। खालिस्तान के नाम का उल्लेख करते हुए भेजे गए ई-मेल के मामलों में इसकी लिप्तता सामने आई है। ऐसे गुजरात में सात मामले दर्ज हैं। छह राज्यों की पुलिस को इसकी तलाश है। जिसमें जिस पश्चिम बंगाल से इसे स्थानीय पुलिस की मदद से पकड़ा है उस बंगाल पुलिस को भी इसकी तलाश है। इसके विरुद्ध साइबर टेररिज्म की धारा भी लगाई है।
जेसीपी सिंघल ने बताया कि सौरव केवल 12वीं पास है, लेकिन साइबर क्षेत्र का जानकार है। यह भारत व अन्य देशों के सालों पुराने ई-मेल आइडी को रिकवर करता, रिकवर करते समय खुद का ई-मेल आईडी डालता और फिर पासवर्ड बदलकर उसे एक्टिव करता था। ऐसे एक्टिव हुए पुराने ई-मेल आइडी को क्रिप्टो करेंसी में बेचता था। 100 क्रिप्टो करेंसी में इससे ई-मेल आइडी खरीदे थे। इस मामले में इसकी बहन साहिस्ता बिस्वास की लिप्तता सामने आई है। वह ढाका बांग्लादेश में रहती है।
सिंघल ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए साइबर क्राइम ब्रांच और क्राइम ब्रांच की टीम ने काफी मशक्कत की। इसे जाल में फंसाने के लिए खुद भी कई बार ऐसे लोगों से ई-मेल खरीदे गए। डॉलर में पैसे चुकाए, जिन ई-मेल को खरीदा गया था, उसमें से एक का उपयोग महाराष्ट्र में भेजे गए धमकी भरे ई-मेल में किया गया, जिससे इसकी लिप्तता की पुष्टि हुई और इसे धर दबोचा। यह डार्क वेब पर लीक हुए डेटा में छेड़छाड़ कर उसे फिर से बेचता होने की भी बात सामने आई है। इसके पास से तीन से चार टीबी डेटा रिकवर हुआ है। 250 ई-मेल मिले हैं,जिसमें से 50 का उपयोग देश में स्कूलों, कोर्ट व अन्य संस्थानों को धमकी भरे ई-मेल भेजने में उपयोग हुआ है। यह बड़ा रैकेट है, इसके ऊपर भी दो और लेयर हैं, जो विदेश में बैठकर इस प्रकार से धमकी भरे ई-मेल भेज रहे हैं। ऐसे ई-मेल बेचने के लिए इसने एक्सपेटसेलर डॉट शॉप नाम से वेबसाइट बनाई थी। उस पर यह कैश एप अकाउंट, बैंक अकाउंट, गुगल वॉइस नंबर, टेक्स नाउ अकाउंट, आईपी-प्रोक्सी सर्विस, वीपीएन सर्विस, प्रीमियम सब्सिक्रिप्शन, टेलाबेट अकाउंट, फेसबुक, इंस्टा, वॉट्सएप, टेलीग्राम अकाउंट, वेलिड फोन नंबर, आरडीपी, वीपीएस सर्विस जैसी सर्विस की बिक्री करता था। एक ईमेल के लिए एक से पांच डॉलर में बेचता। राशि क्रिप्टो करेंसी में स्वीकार करता था।