
अहमदाबाद. स्वतंत्रता दिवस की सुबह जब देश आजादी का पर्व मना रहा था, अहमदाबाद सिविल अस्पताल में एक परिवार अपने सबसे कठिन दुख से गुजर रहा था। ब्रेनडेड घोषित किए गए बुधाभाई परमार (38) के अंगदान से चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला। सिविल अस्पताल में यह 251वां अंगदान रहा।
खेड़ा जिले के कपड़वंज निवासी बुधाभाई गत 10 अगस्त को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अथक प्रयास के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 14 अगस्त को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।
पति को खोने के असहनीय दुख के बीच भावनाबेन और परिवार के लिए अंगदान का फैसला आसान नहीं था। लेकिन सिविल अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. मोहित चंपावत ने परिवार को अंगदान की पूरी प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में समझाया। इसके बाद परिवार ने मानवता का परिचय देते हुए अंगदान के लिए लिखित सहमति दे दी।
परिवार के इस फैसले से बुधाभाई भले ही वापस नहीं लौट सके, लेकिन उनके अंग चार जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की उम्मीद बन गए। अंगदान के जरिए उनके परिवार ने अपने दुख को मानवता की सेवा से जोड़ने का साहसिक उदाहरण पेश किया।
बुधाभाई के हृदय का यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया गया। वहीं उनका लिवर और दोनों किडनी इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) में उपचार करा रहे मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं। इस तरह उनके अंगों से चार मरीजों को जीवन का नया अवसर मिला।
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि स्वतंत्रता पर्व के दिन ब्रेन डेड मरीज के अंगदान से अन्य जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलना मानवता की मिसाल है। उन्होंने अंगदान के लिए बुधाभाई के परिवार के साहसिक और संवेदनशील निर्णय की सराहना की।
उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल में अब तक 251 अंगदाताओं के माध्यम से 1,079 अंग एवं ऊतक प्राप्त हुए हैं। इनमें 464 किडनी, 225 लीवर, 79 हृदय, 34 फेफड़े, 21 पैंक्रियाज, छह हाथ और दो छोटी आंत सहित 831 अंग शामिल हैं। इसके अलावा 200 आंखें और 48 त्वचा दान में मिली हैं, यानी कुल 248 ऊतक प्राप्त हुए हैं