-आवेदकों से पैसे लेकर सरकारी खाते में जमा नहीं करा रहे थे आरोपी, ऑनलाइन की जगह नकद स्वीकारे, रसीद भी दी
Ahmedabad. गुजरात राज्य में स्थापना के समय से ही शराबबंदी लागू है। हालांकि स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए लीकर परमिट जारी किए जाते हैं। अहमदाबाद शहर में यह कार्य सिविल अस्पताल में किया जाता है।
सिविल अस्पताल में होने वाले लीकर परमिट के कामकाज में गड़बड़ी की घटना सामने आई है। लीकर परमिट का काम करने वाले सीनियर क्लर्क व अन्य कर्मचारियों की ओर से आवेदकों के पास से पैसे लेकर सरकारी खाते में जमा नहीं कराकर सरकार को चपत लगाई जा रही थी। एक दो नहीं बल्कि नौ आवेदकों से पैसे 1.80 लाख रुपए नकद लेकर वह राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। इस पर सिविल अस्पताल प्रशासन की ओर से लीकर परमिट का कामकाज देखने वाले मेडिकल ऑफिसर डॉ.जयंत सोलंकी (57) ने शाहीबाग थाने में शुक्रवार को तीन लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई। शाहीबाग पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुई तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
इलाके की सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रीना राठवा ने संवाददाताओं को बताया कि इस मामले में सिविल अस्पताल में लीकर परमिट का कामकाज करने वाले सीनियर क्लर्क करशन सिंह वाघेला, अन्य कर्मचारी नवीनचंद्र डाभी और वसंत कुमार निनामा को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने लीकर परमिट के लिए आवेदन करने वाले नौ आवेदकों से आवेदन फीस के एक लाख 80 हजार रुपए नकद में स्वीकारे, उसकी रसीद भी उन्हें दी, लेकिन यह राशि नकद में लेने के बाद उसे सरकारी बैंक खाता यानी रोगी कल्याण समिति के बैंक अकाउंट में जमा नहीं कराई। इस राशि को आरोपियों ने अपने निजी उपयोग में ले लिया। आवेदकों को दी जाने वाली रसीद में भी छेड़छाड़ करने का आरोप है।
प्राथमिकी के तहत लीकर परमिट के आवेदन की फीस को ऑनलाइन ही स्वीकारना होता है, उसके बावजूद भी आरोपियों ने फीस को नकद में स्वीकारा। नए लाइसेंस के लिए 25 हजार रुपए और लाइसेंस रिन्यु करने की फीस 20 हजार रुपए है। प्राथमिक जांच में अभी एक जनवरी 2026 से 17 मार्च 2026 के दौरान नौ आवेदकों के पास से 1.80 लाख की फीस लेकर जमा नहीं करने का आरोप है। यह आंकड़ा और भी होने के आसार हैं।
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश जोशी ने बताया कि यह मामला ध्यान में आते ही इसकी प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। इसके साथ अस्पताल प्रशासन ने भी जांच के लिए समिति गठित की है। उसमें छह सदस्य हैं। ये समिति जांच करेगी कि कहां, कहां और कैसे चूक हुई। ऑनलाइन स्वीकारी जाने वाली फीस नकद में कैसे स्वीकारी गई और कैसे उसकी रसीद भी निकल आई। ये कब से ऐसा कर रहे थे, उसकी जांच की जाएगी।
इस मामले को स्वास्थ्य विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। इस मामले में सीनियर क्लर्क करशन सिंह वाघेला को निलंबित कर दिया है। जबकि ठेके पर कार्यरत नवीनचंद्र और वसंत कुमार तथा मेहुल पीठे को बर्खास्त कर दिया है।