वडोदरा. आणंद जिले के मालसर गांव के एक एक वर्षीय मासूम बच्चे की जिंदगी बीते डेढ़ महीने से बुखार, खांसी और सांस की गंभीर तकलीफ में उलझी हुई थी। कई निजी अस्पतालों में न्यूमोनिया का इलाज कराने के बावजूद जब कोई राहत नहीं मिली, ऐसे में एक दिन तब परिवार के लिए नई उम्मीद बनकर […]
वडोदरा. आणंद जिले के मालसर गांव के एक एक वर्षीय मासूम बच्चे की जिंदगी बीते डेढ़ महीने से बुखार, खांसी और सांस की गंभीर तकलीफ में उलझी हुई थी। कई निजी अस्पतालों में न्यूमोनिया का इलाज कराने के बावजूद जब कोई राहत नहीं मिली, ऐसे में एक दिन तब परिवार के लिए नई उम्मीद बनकर आया जब बच्चे को वडोदरा स्थित जीएमईआरएस गोत्री अस्पताल लाया गया। यहां ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. हिरन सोनी और उनकी टीम ने गहन जांच की।
रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बच्चे की दाहिनी श्वासनली में कोई बाहरी वस्तु फंसी हुई है। इसके बाद गुरुवार को जनरल एनेस्थीसिया के तहत अत्यंत जटिल ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया की गई और चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक बच्चे को नया जीवन दिया।ऑपरेशन के दौरान जो सामने आया, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। बच्चे की दाईं श्वासनली में एक छोटा एलईडी बल्ब फंसा हुआ था, जो पिछले डेढ़ महीने से उसकी तकलीफ का कारण बना हुआ था।
डॉ. सोनी ने बताया कि इतनी नाजुक उम्र में श्वास नली में कोई वस्तु फंस जाना बेहद जोखिम भरा होता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। गोत्री अस्पताल के आधुनिक उपकरणों और डॉक्टरों की कुशलता ने मासूम को नया जीवन दिया। पूरी कुशलता से बल्ब को सावधानीपूर्वक निकालने के बाद बच्चे की सांसें सामान्य हो गईं। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि समय पर सही उपचार और विशेषज्ञता से असंभव लगने वाली परिस्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है।
बच्चों में अचानक बुखार और खांसी, सांस लेने में कठिनाई और लगातार बुखार को हल्के में न लें। छोटे बच्चों को खिलौने या नुकीली वस्तुएं खेलने के लिए न दें। यदि श्वास नली में कोई वस्तु फंसने का संदेह हो तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।