
Ahmedabad news . ब्रेस्ट कैंसर को आमतौर पर महिलाओं की बीमारी माना जाता है, लेकिन पुरुष भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ), अहमदाबाद के आंकड़े बताते हैं कि यहां ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों में आधे से अधिक की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है।
इंस्टीट्यूट में वर्ष 2021 से 2026 तक अब तक दर्ज 7,920 मरीजों में से 4,212 मरीज 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं। यह कुल मरीजों का 53.18 फीसदी है। वहीं, पांच वर्षों में पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के 89 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि इस बीमारी को लेकर जागरूकता और समय पर जांच कितनी महत्वपूर्ण है।
आंकड़े बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के कुल मरीजों में 30 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के 1 115 मरीज हैं, जो कुल का 14.08 फीसदी है। वहीं, 40 से 50 वर्ष की उम्र के 2,417 मरीज दर्ज किए गए हैं। यह कुल मरीजों का 30.52 फीसदी है। 30 वर्ष से कम आयु के 176 मरीज भी सामने आए हैं, जो कुल का 2.22 फीसदी है। यानी यह बीमारी कम उम्र की महिलाओं में भी हो सकती है, हालांकि मरीजों का सबसे बड़ा हिस्सा 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग का है।
जीसीआरआइ में वर्ष 2024 में ब्रेस्ट कैंसर के 1,464 और वर्ष 2025 में 1,541 मामले दर्ज किए गए। इस तरह एक साल में मरीजों की संख्या में 77 की वृद्धि हुई, जो करीब 5.3 फीसदी है। वर्ष 2026 में अब तक 761 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 753 महिलाएं और आठ पुरुष शामिल हैं। यह आंकड़ा वर्ष के पूरे होने से पहले तक का है।
जीसीआरआइ में वर्ष 2020 से 2024 के बीच पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के कुल 89 मामले दर्ज किए गए। इनमें वर्ष 2020 में 15, वर्ष 2021 में 17, वर्ष 2022 में 16, वर्ष 2023 में 25 और वर्ष 2024 में 16 मामले सामने आए। पुरुषों में यह कैंसर दुर्लभ है, लेकिन बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास और कुछ आनुवंशिक कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं।
जीसीआरआई के वर्ष 2024 के आंकड़ों में 1,510 मरीजों में से 3.31 फीसदी में बीमारी पहले चरण में, जबकि 29.74 फीसदी में तीसरे और 16.16 फीसदी में चौथे चरण में दर्ज की गई। शुरुआती चरण में पहचान और समय पर उपचार से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है।
समय पर जांच कराएंजीसीआरआइ के निदेशक डॉ. शशांक पंड्या के अनुसार स्तन में गांठ, सूजन, आकार में बदलाव, त्वचा में सिकुड़न, असामान्य स्राव होना ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं। उनके अनुसार इस तरह के लक्षण दिखने पर बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करें। गांठ में दर्द न होने पर भी उसे नजरअंदाज न करें। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। समय समय पर जांच कराना हितकर है।