हमारी सीमा पर ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है चीन
अहमदाबाद. पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल वी पी मलिक ने कहा कि चीन पिछले एक दशक से थोड़ा हमारी सीमा पर ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है। भारत व चीन के बीच बॉर्डर इस समय विवादित है। कुछ इलाकों में चीन बार-बार अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करता है। हालांकि खतरनाक बात यह है कि चीन अचानक हमला करने की कोशिश में नहीं है, लेकिन ऐसे दुर्गम इलाकों में चीन चुपके-चुपके अपने आप को आगे बढ़ा रहा है।
जनरल ने कहा कि इसके लिए हमे अपना आधारभूत सुविधाएं मजबूत करनी पड़ेगी ताकि हम अपनी फौज बढ़ा सकें। इन्फ्रास्ट्रक्चर के ठीक होने पर हम अपनी फौज बढ़ा सकेंगे और साथ ही साथ ज्यादा निगरानी भी रख सकेंगे। चीन की हिम्मत नहीं कि वह हमसे अरुणाचल ले जाए। चीन ऐसा नहीं कर सकता, लेकिन वह छोटे-छोटे इलाकों पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करता है जिस पर हमें नजर रखने की जरूरत है।
जनरल मलिक के अनुसार इसके लिए हमे अपना आधारभूत ढांचा मजबूत करना पड़ेगा। जितनी जल्दी सडक़ें बनेंगी उतनी जल्दी हम फौज भेज सकेंगे। यदि हम फौज नहीं भेज सकेंगे तो मुश्किल हो जाएगी। इसलिए सडक़ें, संचार सुविधाएं, एयरफील्ड और हैलिपेड जैसे जरूरतों को दुरुस्त करने की जरूरत है। इसे जितनी जल्दी दुरुस्त करें उतना बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि डोकलाम क्षेत्र विवादित था जो चीन और भूटान के बीच ज्यादा विवादित है। भारत का भूटान के साथ संबंध हैं इसलिए भारत इस मामले में भूटान के साथ है। वहां पर चीन का एक या दो पोस्ट बनाना खास मायने नहीं रखता है। चीन को सडक़ बनाने के लिए मना किया गया था जो उसने नहीं बनाया।
नेताओं को सेना के कार्यों के बारे में जानना जरूरी
जनरल मलिक ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को सेना के कार्यों के बारे में ज्यादा जानना बेहद जरूरी है। इससे दोनों के बीच दूरी घटेगी। उन्होंने इस बार के केन्द्रीय बजट में रक्षा बजट पर आवंटन को समुचित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेनाओं की जरूरतों को देखते हुए यह ज्यादा नहीं है। बजट कम होने के कारण निजी कंपनियां इस क्षेत्र में नहीं आ रही हैं। सैन्य उपकरणों के आयात पर निर्भरता को खत्म करने की जरूरतों पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के बावजूद हमें अपने उपकरणों की कमी को पूरा करने में 10 से 15 वर्ष लगेंगे।