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प्लेन क्रैश स्थल के आस पास जन्मी करुणा, एक साल से बेजुबानों का सहारा

अहमदाबाद विमान दुर्घटना की पहली बरसी पर प्लेन क्रैश स्थल के आसपास चल रही जीवदया की यह अनूठी पहल लोगों का ध्यान खींच रही है। दुर्घटना के बाद क्षेत्र में रहने वाले पशु-पक्षियों के सामने भोजन और पानी का संकट खड़ा हो गया था। इन्हीं बेजुबानों की बेबसी को देखकर समाजसेवी किरण पटणी ने अहमदाबाद महानगरपालिका के सहयोग से सेवा अभियान शुरू किया। एक साल बाद भी यह सेवा बिना रुके जारी है।

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Ahmedabad news

प्लेन क्रेश स्थल पर श्वानों के लिए भोजन की व्यवस्था।

Ahmedabad: एक साल पहले शहर में हुए विमान हादसे ने कई जिंदगियां बदल दी थीं। हादसे की टीस आज भी लोगों के मन में ताजा है। लेकिन उसी त्रासदी के बीच एक ऐसी करुणा ने जन्म लिया, जिसने हजारों बेजुबान जीवों के लिए उम्मीद की नई राह खोल दी। जिस इलाके में कभी अफरा-तफरी और सन्नाटा पसरा था, वहीं आज रोजाना सैकड़ों पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी पहुंचाया जा रहा है।

घर-घर जाकर रोटी व खाना किया जाता है एकत्र

इस अभियान के तहत असारवा, मेघाणीनगर और शाहीबाग समेत शहर के विभिन्न इलाकों से स्वयंसेवक प्रतिदिन घर-घर जाकर रोजाना करीब 250 किलो रोटियां, 140 किलो शाकभाजी, चार किलो अनाज, चार लीटर दूध और फल सहित अन्य खाद्य सामग्री एकत्र करते हैं। इन्हें विशेष वाहन के प्लेन क्रैश स्थल, घोड़ा कैंप, रेलवे लाइन के आसपास के क्षेत्रों व अन्य स्थानों पर रहने वाले गायों, कुत्तों, कबूतरों, मोरों और अन्य बेजुबान जीवों तक पहुंचाई जाती है। उनकी प्यास बुझाने के लिए 42 पानी के बाउल और भोजन के लिए 38 फूड बाउल भी अलग-अलग स्थानों पर रखे गए हैं।

भोजन की बर्बादी भी रुकी

इस पहल की खास बात यह है कि घरों से निकलने वाली अतिरिक्त खाद्य सामग्री का सदुपयोग हो रहा है। एक ओर भोजन की बर्बादी कम हो रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों बेजुबानों को नियमित भोजन मिल रहा है। किरण पटणी और उनकी टीम पिछले एक वर्ष से लगातार इस कार्य में जुटी हुई है।

त्रासदी के बाद महसूस हुई थी यह जरूरत

अहमदाबाद महानगरपालिका के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) के अध्यक्ष नरेश राजपूत के अनुसार दुर्घटना के बाद क्षेत्र में पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की आवश्यकता महसूस की गई थी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह सेवा कार्य शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि महानगरपालिका ऐसे सेवा कार्यों को प्रोत्साहित कर रही है और आगे भी सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वैसे किरण पटणी कई वर्षों से इस तरह की सेवा में जुटे हुए हैं लेकिन प्लेन क्रैश की घटना स्थल पर पहले बड़ी सख्या में ये पशुपक्षी आते थे लेकिन अब वह इलाका सुनसान जैसा हो गया था तो इन जीवों के लिए भी यह सेवा शुरू की गई थी।

संवेदनाओं का दायरा बढ़ा

एक साल पहले जहां विमान हादसे की भयावह यादें थीं, वहीं आज उसी जगह इंसानियत की ऐसी मिसाल दिखाई देती है, जो बताती है कि संवेदनाएं केवल इंसानों तक सीमित नहीं होतीं। कभी-कभी एक त्रासदी भी करुणा का ऐसा बीज बो जाती है, जो हजारों बेजुबानों के जीवन का सहारा बन जाता है।