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प्यार के लिए सरहद लांघी, अब बच्चों से बिछुड़ने का डर

आणंद. आठ साल का बेटा और दो साल का मासूम बच्चा कई दिनों से अपनी मां का चेहरा तक नहीं देख पाए हैं। उनकी एक ही गुहार है-मां को हमसे दूर मत भेजिए। यह दर्दभरी कहानी है बांग्लादेश की रहने वाली मुस्लिम युवती काजुली उर्फ काजल की, जिसने प्यार के लिए सरहद लांघी, हिंदू रीति-रिवाजों से शादी कर नया जीवन शुरू किया, लेकिन अब उसे अपने परिवार से बिछड़ने का डर सता रहा है। जिले के लांभवेल गांव निवासी तरुण कुमार पटेल की करीब 15 वर्ष पहले सोशल मीडिया के जरिए काजल से दोस्ती हुई थी। वक्त के साथ यह दोस्ती प्रेम में बदल गई और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया। बताया जाता है कि परिवार के दबाव और परिस्थितियों के कारण काजल को पासपोर्ट नहीं मिल सका। ऐसे में वह वर्ष 2016 में कथित रूप से अवैध तरीके से भारत पहुंच गई। आणंद आने के बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर लिया। काजल ने हिंदू धर्म अपना लिया और पति के परिवार के साथ सामान्य वैवाहिक जीवन बिताने लगी। इस दौरान उनके घर दो बच्चों ने जन्म लिया। बड़ा बेटा अब आठ वर्ष का है, जबकि छोटा बच्चा महज दो साल का है।

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Crossed Borders for Love; Now Fears Separation from Children

फाइल फोटो

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान के दौरान हुई पहचान, फिलहाल नारीगृह में रखा गया, 12 साल पहले आणंद आकर हिंदू रीति से की थी शादी, दो बच्चों की मां को बांग्लादेश भेजने की तैयारी, पति ने की नागरिकता देने की मांग

बुरहान पठाण

आणंद. आठ साल का बेटा और दो साल का मासूम बच्चा कई दिनों से अपनी मां का चेहरा तक नहीं देख पाए हैं। उनकी एक ही गुहार है-मां को हमसे दूर मत भेजिए। यह दर्दभरी कहानी है बांग्लादेश की रहने वाली मुस्लिम युवती काजुली उर्फ काजल की, जिसने प्यार के लिए सरहद लांघी, हिंदू रीति-रिवाजों से शादी कर नया जीवन शुरू किया, लेकिन अब उसे अपने परिवार से बिछड़ने का डर सता रहा है।
जिले के लांभवेल गांव निवासी तरुण कुमार पटेल की करीब 15 वर्ष पहले सोशल मीडिया के जरिए काजल से दोस्ती हुई थी। वक्त के साथ यह दोस्ती प्रेम में बदल गई और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया। बताया जाता है कि परिवार के दबाव और परिस्थितियों के कारण काजल को पासपोर्ट नहीं मिल सका। ऐसे में वह वर्ष 2016 में कथित रूप से अवैध तरीके से भारत पहुंच गई।
आणंद आने के बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर लिया। काजल ने हिंदू धर्म अपना लिया और पति के परिवार के साथ सामान्य वैवाहिक जीवन बिताने लगी। इस दौरान उनके घर दो बच्चों ने जन्म लिया। बड़ा बेटा अब आठ वर्ष का है, जबकि छोटा बच्चा महज दो साल का है। परिवार की जिंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी।

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान के दौरान हुई पहचान

इसी बीच गुजरात पुलिस द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान काजल की पहचान हुई। बताया जाता है कि बांग्लादेश में अपनी बीमार मां से फोन पर बातचीत के बाद पुलिस को उसके बारे में जानकारी मिली। इसके बाद 2 जून को आणंद लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) टीम ने उसे हिरासत में लेकर बांग्लादेश डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। फिलहाल उसे नारीगृह में रखा गया है।

पति ने कहा, काजल के जीवन को हो सकता है खतरा

मां से दूर हुए दोनों बच्चों का दर्द अब हर किसी को भावुक कर रहा है। बच्चों का कहना है कि उन्होंने कई दिनों से अपनी मां को नहीं देखा और वे उन्हें बहुत याद कर रहे हैं। वहीं, पति तरुण का कहना है कि काजल ने हिंदू धर्म अपना लिया है और यदि उसे बांग्लादेश भेजा गया तो वहां उसके जीवन को खतरा हो सकता है। उनका दावा है कि काजल के परिजन भी उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

भारतीय नागरिकता देने की अपील

पति और बच्चों की गुहार के बाद सोमवार को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने काजल को नारी गृह से पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया। तरुण ने राज्य सरकार और गृह मंत्री से मानवीय आधार पर काजल को भारतीय नागरिकता देने तथा डिपोर्टेशन रोकने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो दो मासूम बच्चों का परिवार बिखर जाएगा।