
रैली में ट्रैक्टरों के साथ भाग देते किसान।
Ahmedabad: किसानों के विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस और 20 से अधिक किसान संगठनों की ओर से सोमवार को अहमदाबाद से गांधीनगर तक प्रस्तावित किसान अधिकार ट्रैक्टर रैली में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। रैली को गांधीनगर जाने की अनुमति नहीं मिलने पर किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। इसके बाद ओगणज में किसानों की सभा हुई, जिस दौरान हंगामा हुआ। किसानों के एक वर्ग ने गांधीनगर कूच की मांग दोहराई, जबकि नेताओं ने उन्हें समझाकर सभा स्थल पर रोकने का प्रयास किया।
इस रैली को गांधीनगर तक जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। प्रशासन ने ओगणज स्थित शताब्दी महोत्सव मैदान तक ही यात्रा की मंजूरी दी थी। यात्रा के आगे बढ़ने पर पुलिस ने जेसीबी और अन्य अवरोधक लगाकर रास्ता रोक दिया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। कई किसान गांधीनगर जाने की जिद पर अड़ गए। इस दौरान ओगणज टोल टैक्स से वैष्णोदेवी सर्कल की ओर रिंग रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ। स्थिति उस समय और उलझ गई जब कुछ किसान पैदल ही गांधीनगर की ओर बढ़ने लगे। एआइसीसी सेवा दल के अध्यक्ष लालजी देसाई और अन्य नेताओं ने उन्हें समझाकर वापस सभा स्थल की ओर भेजा।
सभा के दौरान किसानों के बीच भी मतभेद और हंगामे की स्थिति देखने को मिली। गुजरात प्रदेश किसान समिति के नेता पाल आंबलिया संबोधन के दौरान भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यह उस दौरान था जब उन पर किसानों ने ही सभा स्थल पर आरोप लगाए थे।यात्रा के समन्वय की जिम्मेदारी एआईसीसी सेवा दल के अध्यक्ष लालजी देसाई, किसान नेता पाल आंबलिया, जयेश पटेल, महेश राजकोटिया तथा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने संभाली थी। सभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा, सांसद गेनीबेन ठाकोर सहित अन्य नेताओं ने किसानों के मुद्दे उठाए।
सभा में लालजी देसाई ने सरकार को 11 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो 30 जून को जिला स्तर पर रास्ता रोको और चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।
चावडागुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस रैली में भाग लिया। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के पीछे आप के कार्यकर्ताओं व नेताओं का हाथ है। उन्होंने हंगामा कर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों और सम्मान का सवाल है।
आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को रैली शुरू होने से पहले ही इससे खुद को अलग कर लिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ईसुदान गढ़वी ने कहा कि पार्टी ने इस रैली को समर्थन दिया था, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों की ओर से किसानों की इस रैली को कब्जाने की कोशिश की गई, जिससे पार्टी ने इससे दूरी बनाई है। हालांकि उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी किसानों के साथ है।
किसानों ने उनके खेतों से गुजर रहे निजी कंपनियों की बिजली की हाईटेंशन लाइनों के पर्याप्त मुआवज़े की मांग की है। भूमि अधिग्रहण, फसलों का पर्याप्त मुआवजा और अन्य लंबित मांगें शामिल हैं। बीते एक सप्ताह से मोरबी जिले के जेतपर गांव में वे उपवास पर भी बैठे थे। सुनवाई नहीं होने पर सोमवार को गुजरात किसान कांग्रेस संघर्ष समिति के बैनर तले ट्रैक्टर रैली की घोषणा की गई। रविवार को मोरबी, टंकारा, मालिया और हलवद से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर गांधीनगर के लिए रवाना हुए।
Published on:
15 Jun 2026 10:01 pm
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