
ahmedabad: चीन, पाकिस्तान और भारत से जुड़े साइबर नेटवर्क के जरिए भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहे बॉस स्कैम का अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के दो आरोपियों- इमरान अली पियादा (25) और इंजामुल मोल्ला (30) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से डिजिटल डेटा की जांच में देश के 26 राज्यों की 251 साइबर अपराध शिकायतों के तार जुड़े मिले हैं। पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई से बॉस स्कैम जैसे साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे 10 हजार से अधिक डिवाइस सुरक्षित किए गए हैं, जिससे भारतीय नागरिकों को करोड़ों रुपए की संभावित साइबर ठगी से बचाने में मदद मिली है। इस मामले में आरोपियों से सात मोबाइल फोन और एक एयरटेल राउटर जब्त किया गया है। साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। इमरान दक्षिण 24 परगना जिले के गणेशपुर गांव वहीं इंजामुल कोलकाता के बेनियापुकुर का रहने वाला है
अहमदाबाद के एक व्यापारी को गत 23 जून को व्हाट्सऐप पर मिले मैसेज के माध्यम से बैंक खाते में असामान्य लेन-देन होने और खाते पर रोक लगने का डर दिखाया गया। इसके बाद व्यापारी के नाम से उसके अकाउंटेंट को व्हाट्सऐप संदेश भेजकर वित्त विभाग के नाम पर रकम ट्रांसफर करने को कहा गया। 24 जून को इंडसइंड बैंक के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 1.50 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने से ठगी की रकम में से 1.13 करोड़ रुपए वापस कराए गए।
पुलिस के अनुसार कोलकाता के बेनियापुकुर का रहने वाला आरोपी इंजामुल साइबर ठगी से जुड़े लोगों के संपर्क में था। वह फर्जी सिम और व्हाट्सऐप आधारित संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद करता था। वहीं दक्षिण 24 परगना जिले के गणेशपुर गांव का रहने वाला आरोपी इमरान दूरसंचार कंपनियों के पॉइंट ऑफ सेल के रूप में काम करता था। वह ग्राहकों के बायोमेट्रिक का इस्तेमाल कर उनके नाम पर सिम जारी कराने के बाद दूसरी कंपनियों के फर्जी सिम हासिल करता था। इन सिम के नंबर साइबर ठगों को उपलब्ध कराए जाते थे और वाट्सऐप खाता सक्रिय कराने के लिए आने वाला ओटीपी भी उन्हें दिया जाता था।
जांच में सामने आया कि इमरान ने करीब पांच साल में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए करीब 21 हजार ओटीपी बेचकर 21 लाख रुपए से अधिक कमाए। वहीं व्हाट्सऐप खाते सक्रिय कराने के लिए करीब 900 ओटीपी बेचने की बात भी सामने आई है।
सायबर क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपियों के मोबाइल में मिले करीब 4500 सिम कार्ड की जानकारी के आधार पर साइबर क्राइम ब्रांच ने 251 शिकायतों का विश्लेषण किया। इनमें 194 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, तीन बॉस स्कैम और अन्य साइबर अपराधों की शिकायतें शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार आइ4सी और अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच के तकनीकी एवं नेटवर्क विश्लेषण में इस्तेमाल मालवेर के चीन की साइबर गैंग से जुड़े होने की आशंका सामने आई है। भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित कॉल सेंटर के इस्तेमाल के भी संकेत मिले हैं। साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों को चीन आधारित वीपीएन के जरिए एक्सेस किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपनी पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए चीन, भारत, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े मल्टी-कंट्री साइबर ढांचे का इस्तेमाल किया।