सर्वाधिक सुधार वाले राज्यों की श्रेणी में गुजरात प्रथम स्थान पर, 2015 की तुलना में 2023 में टीबी के नए मरीजों के पंजीकरण दर में 34 फीसदी कमी
टीबी मुक्त भारत अभियान में गुजरात का अहम योगदान रहा है। पिछले वर्ष जनवरी से अप्रेल में टीबी के चलते राज्य में हुई मौत की तुलना में इस वर्ष इस अवधि में 50 फीसदी की कमी आई है।वर्ष 2025 के पहले चार महीनों में टीबी के नए 45282 रोगी सामने आए थे। इनमें से 1011 मरीजों की मौत हुई। जबकि पिछले वर्ष इस समयावधि में 2201 मरीजों की मौत हुई थी। इस तरह के परिणामों के चलते केंद्र सरकार ने गुजरात को सर्वाधिक सुधार वाले राज्यों की श्रेणी ( स्टेट्स वीथ मोस्ट इम्प्रूवमेंट कैटगरी) में प्रथम स्थान पर रखा है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल के अनुसार टीबी उन्मूलन की दिशा में अहम कदम उठाए जाने से मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2023 में टीबी के नए मरीजों के पंजीकरण दर में 34 फीसदी कमी आई है वहीं मृत्युदर में 37 फीसदी की कमी देखने को मिली है। पिछले तीन वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में वर्ष 2022 में 142133, वर्ष 2023 में 133677 और वर्ष 2024 में 133805 नए टीबी रोगी सामने आए थे। इनमें से वर्षवार क्रमश: 130438, 122588 और 124671 रोगी इस बीमारी को हराकर ठीक हो चुके हैं।
पटेल का कहना है कि टीबी रोगियों को पौष्टिक भोजन तथा श्रेष्ठ उपचार उपलब्ध कराकर मृत्यु दर को कम करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। ट्रूनैट मशीन के माध्यम से राज्य की प्रत्येक तहसील में टीबी की जांच संभव होगी। इसके लिए 180 मशीनों की खरीदी का कार्य प्रगति पर है। फिलहाल 141 ट्रूनैट मशीनों से यह सेवा मरीजों को मिल रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वर्ष 2018 में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम आरंभ किया गया था। राज्य में टीबी के मरीजों के निदान के लिए 2251 नि:शुल्क सूक्क्ष्म प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्O है। राज्य में 10,832 निक्षय मित्र का रजिस्ट्रेशन निक्षय पोर्टल पर किया गया है।