
अहमदाबाद. गुजरात में नए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के कामकाज संभालने के साथ ही राज्य में दिव्यांगों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। उन्हें अब सरकारी नौकरियों में चार फीसदी आरक्षण मिलेगा। यह लाभ उन्हें वर्ग एक, वर्ग दो और वर्ग तीन के पदों पर होने वाली सीधी भर्तियों में दिया जाएगा। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बाबत शुक्रवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्य में दिव्यांग एवं अशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं संपूर्ण हिस्सेदारी) अधिनियम-1995 की धारा 33 के तहत अब तक सीधी भर्ती में दिव्यांगों के लिए 3 फीसदी आरक्षण लागू था।
भारत सरकार की ओर से 2016 में द राइटस ऑफ पर्सन विथ डिसएबिलिटी एक्ट के तहत दिव्यांगों के लिए सीधी भर्ती में चार फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान का राज्य में पालन कराने के लिए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जिस पर अधिसूचना जारी कर दी है। इससे राज्य में अब नेत्रहीन एवं कमदृष्टि वाली विकलांगता, बधिर एवं कम सुनने वाले, हलनचलन की दिव्यांगता, एसिड अटैक पीडि़त, ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, मूकबधिरता, नेत्रहीनता सहित एक साथ एक से ज्यादा दिव्यांगता वाले दिव्यांगों को चार फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इसके लिए सभी विभागों को अलग से रोस्टर रजिस्टर बनाना होगा। दिव्यांगों को आरक्षण का यह लाभ वे जिस वर्ग से हैं, उस वर्ग के लिए आरक्षित पदों के अधीन दिया जाएगा। इसलिए भर्ती के आवेदन के समय दिव्यांगों को उनके वर्ग का उल्लेख करना भी जरूरी है। साथ ही उन्हें दिव्यांगता का मान्यअधिकारी व प्रशासन द्वारा जारी प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
इन विभागों में मिलेगा लाभ
अधिसूचना के तहत दिव्यांगों को चार फीसदी आरक्षण का लाभ राज्य सेवा, पंचायत सेवा इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत बोर्ड, निगम, सार्वजनिक उपक्रम, वैधानिक संस्थाओं, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों में दिया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार से अनुदान, ऋण, आर्थिक मदद प्राप्त करने वाली सभी संस्थाओं, सहकारी संस्थाओं, महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं में भी यह आरक्षण का लाभ दिव्यांगों को मिलेगा।
लाभ न देने के लिए विभागों को लेनी होगी मंजूरी
जो विभाग अपने संबंधित संवर्ग या पदों पर दिव्यांगों को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहते हैं। ऐसे विभागों को उसके लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के समक्ष व्यापक एवं ठोस कारणों के साथ प्रस्ताव पेश करना होगा। जिस पर विशेषज्ञ की उप समिति की ओर से जांच की जाएगी और उस जांच के अनुरूप विभाग को कायमी और अंशकालिक छूट दी जाएगी।