अहमदाबाद

टीबी नहीं, निकला बैक्टीरियल संक्रमण, सर्जरी से बची किशोरी ने डॉक्टर को बांधी राखी

रक्षाबंधन और ईद के पर्व के दौरान अहमदाबाद सिविल अस्पताल स्थित गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट में धर्म और मजहब की सीमाओं से परे मानवता और डॉक्टर-मरीज के रिश्ते की भावुक तस्वीर सामने आई।
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मरीज से राखी बंधवाते स्पाइन स

ahmedabad: बिहार की 14 वर्षीय किशोरी इकरा शेख ने अपने स्पाइन सर्जन डॉ. पीयूष मित्तल की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें भाई और रक्षक का दर्जा दिया। खास बात यह है कि जिस चिकित्सक ने इकरा को गलत निदान और संभावित बड़ी सर्जरी से बचाया, उसी के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए उसने रक्षाबंधन पर राखी बांधी।इकरा को कुछ समय पहले कमर में तेज दर्द शुरू हुआ था। सामान्य दवाओं से राहत नहीं मिली तो अन्यत्र कराई गई जांच और एमआरआइ के आधार पर उसे टीबी बताया गया और सर्जरी की जरूरत बताई गई। इससे परिवार चिंतित हो गया। बेहतर उपचार की उम्मीद में परिजन उसे अहमदाबाद गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट लेकर पहुंचे।

बायोप्सी से खुला बीमारी का राज

संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. मित्तल ने रिपोर्ट देखने के बाद सटीक निदान के लिए बायोप्सी कराने की सलाह दी। शुरुआत में परिवार बायोप्सी के नाम से घबरा गया और इसे कराने से इनकार करते हुए टीबी का उपचार जारी रखने की बात कही। चिकित्सकीय समझाइश के बाद परिवार तैयार हुआ।

निकला स्यूडोमोनास बैक्टीरिया का संक्रमण

बायोप्सी रिपोर्ट में सामने आया कि इकरा को टीबी नहीं, बल्कि स्यूडोमोनास बैक्टीरिया का संक्रमण था। इसके बाद उसे संक्रमण के अनुरूप एंटीबायोटिक उपचार दिया गया। बिना अनावश्यक सर्जरी और टीबी की दवाओं के उपचार से इकरा के दर्द में राहत मिलने लगी और उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में इकरा ने डॉ. मित्तल को राखी बांधते हुए कहा कि उन्होंने उसे गलत उपचार और बड़ी सर्जरी से बचाया। वे मेरे लिए केवल डॉक्टर नहीं, भाई और रक्षक समान हैं। उन्होंने ने भी इसे भावुक क्षण बताते हुए कहा कि यह सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन जाता है। साथ ही कहा कि आज राखी बांधते समय उन्हें डॉक्टर के रूप में नहीं, बल्कि भाई के रूप में गर्व महसूस हुआ।

गलत दवा से बचने की सलाह

निदेशक ने कहा कि किसी भी संक्रमण में बिना पर्याप्त जांच के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। सही बैक्टीरिया की पहचान के बाद ही उपयुक्त उपचार तय किया जाना चाहिए। गलत निदान और बिना जांच उपचार से बीमारी लंबी खिंच सकती है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या भी पैदा हो सकती है।

Updated on:
26 Aug 2026 10:30 pm
Published on:
26 Aug 2026 10:30 pm