अहमदाबाद

मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में शांति के लिए ध्यान और सकारात्मक सोच जरूरी : मुर्मु

राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में तनाव, हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच शांति स्थापित करने के लिए ध्यान और सकारात्मक सोच आवश्यक है। केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था जरूरी है, जो बुद्धि के साथ विवेक को भी जागृत करे।
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Meditation and positive thinking essential for peace in the current global scenario: Murmu
सेंटर का लोकार्पण, परियोजना का शुभारंभ करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।

वडोदरा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को शहर के पास पादरा स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नवनिर्मित ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व नवनिर्माण’ परियोजना का भी विधिवत शुभारंभ किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में तनाव, हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच शांति स्थापित करने के लिए ध्यान और सकारात्मक सोच आवश्यक है। केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था जरूरी है, जो बुद्धि के साथ विवेक को भी जागृत करे।
राष्ट्रपति ने ‘स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा वैश्विक शांति के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने वडोदरा सेंट्रल जेल में पिछले 30 वर्षों से कैदियों के सकारात्मक परिवर्तन के लिए किए जा रहे आध्यात्मिक प्रयासों का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस समाज के विभिन्न वर्गों के बीच शांति और सद्भाव बढ़ाने का केंद्र बनेगा।

आत्म-अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर जोर

राष्ट्रपति ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारत की युवा आबादी वर्ष 2047 तक देश को आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने डिजिटल युग की चुनौतियों के बीच युवाओं से आंतरिक शक्ति, आत्म-अनुशासन और नैतिक मूल्यों को विकसित करने की अपील की। राष्ट्रपति ने मानवता की सेवा को सच्ची पूजा बताते हुए युवा पीढ़ी से ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम के साथ कार्य करने की अपील की।

आध्यात्मिक जागृति से विश्व का नवनिर्माण संभव : राज्यपाल

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि संघर्ष के मौजूदा दौर में आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से ही विश्व का नवनिर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य नैतिक मूल्यों को नहीं अपनाता, तो भौतिक विकास कल्याण के बजाय विनाशकारी साबित हो सकता है। राज्यपाल ने युवा पीढ़ी को नशामुक्त बनाने और उसे सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था के त्याग और मानव सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए नए केंद्र को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मन की शांति और आत्मिक शक्ति पर जोर

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, अलकापुरी सब जोन की निदेशक डॉ. निरंजना, उषा दीदी ने स्वागत संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में केवल बाहरी सुविधाएं ही नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मिक शक्ति भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति सहित अन्य ने परिसर में पौधरोपण किया और इसके बाद ध्यान भी किया।

Updated on:
23 Sept 2026 10:46 pm
Published on:
23 Sept 2026 10:46 pm