
केवडिय़ा (नर्मदा). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के संवाद और एकता की शक्ति को समझते हुए देश के ५६० राजा-रजवाड़ों ने अपने राज्यों का अखंड भारत में विलय कर दिया। देखते देखते भारत एक हो गया। सैकड़ों राजाओं-रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें राजा रजवाड़ों के इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए। मेरा सपना है कि इसी स्थान (स्टेच्यू ऑफ यूनिटी) को जोड़ते हुए ५६० राजा रजवाड़े थे, उसका भी एक वच्र्युअल म्यूजिम तैयार हो। ताकि राजाओं-रजवाड़ों की सदियों पुरानी पुस्तैनी परंपराओं को दर्शाया जा सके। उनके त्याग, समर्पण को दर्शाया जा सके। ज्ञात को पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने भी चंद दिन पहले ही पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की थी कि स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर अखंड भारत में शामिल सभी राजाओं-रजवाड़ों के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाला शिलालेख लगे और म्यूज्यिम बनाया जाए, ताकि उनके वंशज भी गौरवान्वित महसूस कर सकें। देश व भावी पीढिय़ों को भी रजवाड़ों के इतिहास को जानने का मौका मिले।
ज्ञात को पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने भी चंद दिन पहले ही पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इस संबंध में मांग की थी। शंकर सिंह वाघेला ने भी ट्विट करके प्रधानमंत्री की ओर से उनके पत्र में लिखी गई मांगों को मानने पर आभार व्यक्त किया।
सीएम रहते रखा विचार, पीएम रहते समर्पित
प्रधानमंत्री (पीएम) नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वे सौभाग्यशाली है कि मुख्यमंत्री (सीएम) रहते हुए उन्होंने सरदार पटेल की इस विशाल प्रतिमा की कल्पना की थी और आज पीएम रहते हुए इसे देश को समर्पित करने का पुण्य काम करने का मौका मिल रहा है। उन्होने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था।
इतिहास में दर्ज दिन, मिटा पाना मुश्किल, भविष्य का आधार भी:
पीएम ने कहा कि भारत की पहचान, भारत के सम्मान के लिए समर्पित एक विराट व्यक्तित्व को उचित स्थान देने का अवसर है। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए एक नया इतिहास रचा है बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का एक गगनचुंबी आधार भी तैयार किया है। किसी भी देश के इतिहास में ऐसे अवसर आते हैं जब वो पूर्णता का ऐहसास कराते हैं। आज यो वो पल है। जो राष्ट्र के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उसको मिटा पाना बहुत मुश्किल होगा।
सबसे कम समय में बनी सबसे ऊंची प्रतिमा
मोदी ने कहा कि यह श्रेष्ठ इंजीनियरिंग और तकनीक सामथ्र्य का भी प्रतीक है। सबसे कम समय में विश्व की सबसे ऊंची यह प्रतिमा बनी है। बीते साढ़े तीन साल में औसतन हर दिन ३४०० कामगार, २५० इंजिनीयर व शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है। शिल्पकार राम सुथार की अगुवाई में देश के अद्भुत शिल्पकारों की टीम ने कला के इस गौरवशाली स्मारक को पूरा किया है।