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गहलोत का केंद्र पर हमला, जातिगत जनगणना में खामी छोड़ी तो ओबीसी दशकों पीछे जाएगा

गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति (जीपीसीसी) मुख्यालय में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गहलोत ने कहा कि कांग्रेस 2021 से ही सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 2023 से लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भी लिखा था। खरगे इससे पहले 2023 और मई 2025 में भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।
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अहमदाबाद

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Rajesh Bhatnagar

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Updated: 5 Sep 2026, 9:33 PM IST

Gehlot attacks Centre: Flaws in caste census could set OBCs back by decades

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

जाति का नाम खुला छोड़ने से एक ही जाति कई नामों से दर्ज हो सकती है, सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे

अहमदाबाद. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश में करीब 4,200 जातियां हैं और केंद्र व राज्य सरकारों के पास उनकी प्रमाणित सूचियां पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद जनगणना के दौरान जाति का नाम दर्ज करने के लिए पहले से तैयार सूची उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसा क्यों किया गया?
गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति (जीपीसीसी) मुख्यालय में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गहलोत ने कहा कि कांग्रेस 2021 से ही सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 2023 से लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भी लिखा था। खरगे इससे पहले 2023 और मई 2025 में भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।
गहलोत ने कहा कि मौजूदा प्रश्नावली में करीब 40 सवाल हैं और प्रश्न संख्या 10 से ही इसकी खामी सामने आती है। जातिगत जनगणना के लिए खुले विकल्प वाला सवाल रखा गया है। मौजूदा व्यवस्था में नागरिक अपनी जाति या उपजाति का नाम बताएगा और गणनाकर्मी उसे उसी रूप में दर्ज करेगा। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही जाति के अलग नाम, उपजातियां, स्थानीय बोलियां और वर्तनी के अंतर के कारण एक जाति कई नामों से दर्ज हो सकती है। इससे जातियों की वास्तविक संख्या सामने आने में परेशानी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग का उल्लेख तक नहीं है। गलत आंकड़े केवल सांख्यिकीय त्रुटि नहीं होंगे, बल्कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में ओबीसी-ईबीसी की हिस्सेदारी पर असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा, लोकसभा, नौकरशाही और अन्य संस्थाओं में इन वर्गों की वास्तविक भागीदारी का आकलन भी प्रभावित होगा।
गहलोत ने मांग की कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में भाजपा सरकार को सही जातिगत जनगणना करानी ही होगी।

हल्द्वानी की घटना पर कार्रवाई की मांग

गहलोत ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की घटना को जातिवादी मानसिकता का प्रदर्शन बताया। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस से एफआइआर दर्ज कर एससी-एसटी अधिनियम, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम और अन्य लागू प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही आयोजकों की पहचान सार्वजनिक करने और अब तक की कार्रवाई की जानकारी देने की मांग की। संवाददाता सम्मेलन में गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा व विधानसभा में विपक्ष के नेता तुषार चौधरी भी मौजूद थे।