अहमदाबाद. ऑटिज्म जैसी न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या से जूझ रहे बच्चों में से 80 फीसदी उचित डायट और कसरत से ठीक हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऑटिज्म का सही समय पर निदान हो और डाइट-कसरत को सही तरीके से अपनाया जाए तो इस तरह के बच्चों में यह काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है। […]
अहमदाबाद. ऑटिज्म जैसी न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या से जूझ रहे बच्चों में से 80 फीसदी उचित डायट और कसरत से ठीक हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऑटिज्म का सही समय पर निदान हो और डाइट-कसरत को सही तरीके से अपनाया जाए तो इस तरह के बच्चों में यह काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है। शेष 20 प्रतिशत मामलों में दवाओं की आवश्यकता होती है।स्पेशलिटी होम्योपैथी के डॉ. केतन पटेल ने विश्व ऑटिज्म दिवस के उपलक्ष्य में एक बातचीत के दौरान बताया कि ऑटिज्म में जेनेटिक, मेटाबोलिक और माइटोकॉन्ड्रियल कारण होते हैं, जिनका इलाज होम्योपैथी से संभव है। इसके साथ ही डाइट और एक्सरसाइज से बच्चों के जेनेटिक प्रभाव को 90 प्रतिशत तक नियंत्रित किया जा सकता है। पश्चिमी देशों के प्रोटोकॉल सीमित परिणाम देते हैं, भारत को भी अपनी अनूठी उपचार पद्धति विकसित करनी चाहिए। ऑटिज्म से पीड़ित न सिर्फ गुजरात और देश के बल्कि विदेश से भी मरीज डॉ. केतन के पास उपचार को आते हैं। उनके अनुसार अब तक लगभग 500 विदेशी बच्चों का उपचार किया है।
जेनेटिक और मेटाबोलिक रिसर्च विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. जयेश शेठ का कहना है कि ऑटिज्म मानसिक मंदता नहीं, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के बीच वायरिंग में गड़बड़ी है, जो बच्चों की सोचने और बोलने की क्षमता को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान उपचार को और प्रभावी बनाती है।
भारत में 100 में से एक बच्चा प्रभावितविशेषज्ञों के अनुसार अमरीका में हर 31 बच्चों में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होता है, जबकि भारत में यह अनुपात लगभग 100 में से एक है। इसका मतलब यह है कि भारत की तुलना में अमरीका में यह प्रकोप ज्यादा है। हालांकि विकसित देशों में इस रोग वाले बच्चों के लिए अनूठी सुविधाएं भी हैं।
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ऑटिज्म के प्रमुख लक्षण
समय पर बोलने में कठिनाईआंखों का संपर्क न बनाना
अकेले खेलनाबिना कारण हंसना या रोना
बार-बार एक जैसी गतिविधियां करना आदि हैं।