अहमदाबाद

शहर में 149 वीं रथयात्रा के दिन ननिहाल में दो स्थानों पर होगी मामेरा की रस्म

करीब 25 से 30 वर्षों बाद मोटी वासण शेरी स्थित भगा भगत की पोल स्थित मूल ऐतिहासिक रणछोड़राय मंदिर में भी मामेरा परंपरा का पुनर्स्थापन किया जाएगा।
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RATH YATRA
मंदिर के महंत लक्ष्मणदास महाराज।

Ahmedabad: शहर में आगामी 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा में इस बार सरसपुर स्थित भगवान के ननिहाल में पहली बार दो स्थानों पर मामेरा की रस्म निभाई जाएगी। वर्षों से चली आ रही रणछोड़राय मंदिर चौराहा की परंपरा यथावत रहेगी।

भगवान के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध सरसपुर में मामेरा की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। यहां स्थित प्राचीन रणछोड़राय मंदिर में पारंपरिक मामेरा की रस्म दोबारा निभाई जाएगी। मंदिर के महंत लक्ष्मणदास महाराज ने बताया कि वर्ष 1878 में रथयात्रा प्रारंभ होने के दौरान इसी मंदिर में रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत सत्कार किया गया था। उसी दौरान से यहीं पूजा-अर्चना, आरती और मामेरा की रस्म संपन्न होती थी।

समय के साथ श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखते हुए यह परंपरा रणछोड़राय मंदिर चौराहा पर स्थानांतरित हो गई थी। अब मूल ऐतिहासिक मंदिर में इस परंपरा का पुनर्स्थापन किया जा रहा है।मामेरा में अर्पित की जाएंगी सौगातें

उन्होंने बताया कि रथयात्रा के दिन ननिहाल की ओर से भगवान जगन्नाथ को चांदी की मुरली, चांदी का सुदर्शन चक्र, विशेष वस्त्र अर्पित किए जाएंगे। वहीं बड़े भाई बलराम को चांदी का हल तथा बहन सुभद्रा को सोने-चांदी के आभूषण और पारंपरिक वस्त्र मामेरा स्वरूप भेंट किए जाएंगे। रथयात्रा के दौरान सरसपुर आगमन पर संत-महंतों व श्रद्धालुओं और नगरवासियों के लिए महाप्रसाद (भोजन) की व्यवस्था भी की गई है।

परंपरा का संरक्षण करना उद्देश्यमहंत लक्ष्मणदास महाराज ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य किसी परंपरा में परिवर्तन करना नहीं, बल्कि रथयात्रा से जुड़ी लगभग डेढ़ शताब्दी पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन करना है। रणछोड़राय मंदिर चौराहा पर वर्षों से चली आ रही मामेरा परंपरा पूर्ववत पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ जारी रहेगी।

कल से दो दिन होंगे मामेरा के दर्शनमहंत के अनुसार स्थानीय लोगों की ओर से संयुक्त रूप से दी जाने वाली सौगातों (मामेरा) को पहले दर्शन के लिए रखा जाएगा।शनिवार और रविवार को सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक मूल ऐतिहासिक रणछोड़राय मंदिर में दर्शन किए जा सकेंगे।

Updated on:
09 Jul 2026 10:18 pm
Published on:
09 Jul 2026 10:17 pm