
अहमदाबाद. राइट टू एजूकेशन एक्ट-२००९ (आरटीई)के तहत निजी स्कूलों में गरीब वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों से फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है। ओबीसी, एससी, एसटी एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सोला थाने में पुलिस निरीक्षक को इस बाबत लिखित शिकायत दी।
मंच के उप प्रमुख मुकेश भरवाड़, छात्रनेता नारायण भरवाड़ ने बताया कि कई निजी स्कूल ऐसे भी हैं, जिन्होंने तो आरटीई के तहत आवंटित किए गए प्रवेश वाले बच्चों को प्रवेश भी नहीं दिया है। कई प्रवेश देने के लिए फीस मांग रहे हैं। कई तो वसूल भी रहे हैं। कुछ स्कूलों ने ऐसे बच्चों से फीस वसूलने का स्वीकार भी किया है और वापस देने की बात भी लिखित में कही है। ऐसे स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
आरटीई नियमानुसार निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का प्रावधान है। इनकी शिक्षा का खर्च सरकार वहन करती है।
ज्ञात हो कि इससे पहले छात्र नेता नारायण भरवाड़ की ओर से सीटीएम और वस्त्राल में स्थित निजी स्कूलों में प्रदर्शन करके उनकी ओर से ली जा रही फीस का विरोध किया था। छात्रनेताओं के दबाव और प्रदर्शन के चलते स्कूल प्रबंधनों की ओर से भी लिखित में आश्वासन दिया गया है कि वह आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों से ली गई फीस को वापस लौटाएंगे। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री भूपेन्द्र सिंह चुड़ास्मा ने भी स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों से निजी स्कूल कोई भी फीस नहीं वसूल सकते हैं।
डीजीपी को भी सौंपा ज्ञापन
मंच की ओर से बुधवार को गुजरात के पुलिस महानिरीक्षक (डीजीपी) को भी लिखित में इस बाबत ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें आरटीई की अनदेखी करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें कहा है कि १६ मई २०१८ को आरटीई के तहत आवेदन करने वाले बच्चों को पहले चरण का प्रवेश दिया गया। लेकिन कई स्कूलों ने कई बच्चों को प्रवेश नहीं दिया है। दूसरे चरण के प्रवेश जारी होने थे, जो आज भी जारी नहीं हुए हैं। जिससे ३० हजार विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हैं।