अहमदाबाद

Ahmedabad: अतिथि सत्कार को सजा ननिहाल, भांजों के बनाए जा रहे व्यंजन

सरसपुर निवासी भरत पद्मशाल बताते हैं कि रथयात्रा के दिन सरसपुर की हर शेरी और पोल श्रद्धालुओं के स्वागत का अपना अलग अंदाज रखती है। कहीं मोहनथाल, पूड़ी और सब्जी का प्रसाद है, तो कहीं खीचड़ी, फुलवड़ी, बूंदी के लड्डू तो कहीं अन्य व्यंजन परोसे जाते हैं। सरसपुरवासी लोगों को भानेज मानकर स्नेह, सम्मान से भोजन कराते हैं।
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Saraspur Rathyatra
रथयात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए की जा रही भोजन की व्यवस्था।

Ahmedabad: शहर में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए सरसपुर केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि भगवान के ननिहाल के रूप में जाना जाता है। रथयात्रा में शामिल हर श्रद्धालु को सरसपुर में भानेज माना जाता है। ऐसे में गुरुवार को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा के स्वागत के लिए सरसपुर की शेरियों और पोलों में प्रसाद बनाने के लिए रसोइ शुरू हो गईं। कहीं मोहनथाल तैयार हो रहा है, तो कहीं पूड़ियां तली जा रही हैं। रथयात्रा के दिन यहां करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु भोजन, प्रसाद ग्रहण करेंगे।

सरसपुर की लुहार शेरी में सोमवार से ही प्रसाद बनाने का काम शुरू हो गया है। पहले दिन पूरे दिन मोहनथाल तैयार किया गया, जबकि मंगलवार से पूड़ियां बनने लगीं हैं। बुधवार तक फूलवड़ी और देर रात तक सब्जी भी तैयार की जाएगी। यहां करीब 15 से 18 हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है।लुहार शेरी युवक मंडल के नरेंद्र जाड़ेजा ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले ही तैयारियां शुरू हुई हैं। पूरे वर्ष लोग इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। सेवा का उत्साह ऐसा है कि प्रसाद की व्यवस्था को लोग स्वयं आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग देते हैं।

लगभग दो लाख श्रद्धालुओं के प्रसाद की व्यवस्था

सरसपुर निवासी जयेंद्र दोशी और जतिन दोशी बताते हैं कि रथयात्रा के दिन पूरे सरसपुर में करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। लुहार शेरी के अलावा वासणशेरी, कडियावाड़, बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर, आमलीवाड़, गांधी की पोल, ठाकोरवासी, बाला हनुमान मंदिर, पीपला की पोल, सालवीवाड़ और पांचावाड़ सहित करीब दस स्थानों पर भोजन की व्यवस्था रहती है। देसाई की पोल में श्रद्धालुओं के लिए चाय की सेवा भी की जाती है। रथयात्रा के दिन अन्य जगह चाय मिलना मुश्किल होता है।

राजस्थान के हलवाई तैयार करते हैं पकवान

लुहार शेरी की रसोई में 35 वर्षों से राजस्थान के पाली जिले के देसूरी के मूल निवासी प्रकाश डूंगाराम दोशी अपनी टीम के 50 सदस्यों के साथ पकवान तैयार करते हैं। प्रकाश दोशी बताते हैं कि तीन दिन पहले तैयार होने के बावजूद प्रसाद की गुणवत्ता और स्वाद बरकरार रहता है।

Updated on:
14 Jul 2026 10:08 pm
Published on:
14 Jul 2026 10:08 pm