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Ahmedabad: निज मंदिर लौटे जगन्नाथ, नेत्रोत्सव विधि में उमड़े श्रद्धालु

-उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने की महाआरती, मंदिर पर ध्वजा चढ़ाई, रथयात्रा के पूरे रूट पर की गई सुरक्षा व्यवस्था का खुद लिया जाएगा, डीजीपी, सीपी व उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर की समीक्षा, तकनीक पर विशेष जोर देने के निर्देश
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Netrotsav vidhi

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने जगन्नाथ मंदिर में ध्वजा चढ़ाई। 

Ahmedabad. शहर के सरसपुर रणछोड़राय मंदिर से भगवान जगन्नाथ मंगलवार सुबह जमालपुर स्थित निज मंदिर लौटे। उनके लौटने पर नेत्रोत्सव विधि की गई, जिस दौरान दर्शन को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी नेत्रोत्सव विधि में उपस्थित रहे। मंदिर पर ध्वजा चढ़ाई और महाआरती में सहभागी हुए। 15 दिनों बाद भगवान के लौटने पर ‘नवयौवन दर्शन’ के साथ गर्भगृह में प्रभु की आंखों पर रेशमी पट्टी बांधने की परंपरागत नेत्रोत्सव विधि की गई। मान्यता है कि ननिहाल में ज्यादा जामुन, ककड़ी खाने से भगवान की आंखों में संक्रमण हो गया था, जिससे उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई। भक्तों को भव्य ‘सोनावेश’ (शृंगार) में भगवान के दर्शन का लाभ मिला। इस दौरान मंदिर में संतों, महंतों के लिए भंडारा भी किया गया। अब रथयात्रा के दिन यानी 16 जुलाई की सुबह रथयात्रा से पहले भगवान की आंखों पर बंधी पट्टी को खोला जाएगा। उसके बाद भगवान नगर भ्रमण करते हुए ननिहाल पहुंचेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने रथयात्रा के पूरे रूट का किया निरीक्षण

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने मंगलवार को रथयात्रा के समग्र रूट का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और सुरक्षा इंतजामों की व्यापक समीक्षा की। रूट के संवेदनशील पॉइंट्स, कानून व्यवस्था की स्थिति और आपातकालीन सेवाओं के अग्रिम आयोजन को लेकर डीजीपी और सीपी व अन्य अधिकारियों से चर्चा की।

संवाददाताओं से बातचीत में संघवी ने कहा कि 149वीं रथयात्रा की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे रूट को 26 रेंज, 53 एरिया और 1397 पॉइंट्स में बांटा है। समग्र रूप पर 10 आइजी और डीआइजी, 42 डीसीपी और 88 एसीपी अधिकारियों सहित 30,000 से अधिक पुलिस जवानों, 15 एसआरपीएफ और 9 सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियां तैनात की गई हैं। स्मार्ट पुलिसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी और निगरानी तथा 3डी मैपिंग जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है।

100 ड्रोन से की जाएगी निगरानी

उन्होंने बताया कि 100 से अधिक ड्रोन के जरिए लाइव सर्विलांस किया जाएगा। हाथियों की देखरेख के लिए जीपीएस, सीसीटीवी और डेसिबल मीटर, बॉडी-वॉर्न कैमरे, हाईटेक वायरलेस सिस्टम, एआइ वॉयस बॉट, एंटी-ड्रोन गन और संदिग्ध तत्वों एवं अपराधियों को पकड़ने के लिए ‘एआई फेस रिकॉग्निशन कैमरे’ जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है।