सिविल अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सा क्षमता और विशेषज्ञता का प्रदर्शन देखने को मिला है। अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर 47 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल और दुर्लभ फिओक्रोमोसायटोमा गांठ को लेप्रोस्कोपी पद्धति से सफलतापूर्वक हटा दिया। इस सर्जरी के बाद मानो मरीज को नया जीवन मिल गया।इस सर्जरी की विशेषता यह रही कि मरीज को 21 वर्ष पहले भी इसी गांठ की सर्जरी सिविल अस्पताल में हुई थी। सामान्यतः ऐसी गांठ दूसरी बार नहीं होती, लेकिन इस मरीज को वर्षों बाद फिर वही समस्या हुई। पिछले कुछ दिनों से उन्हें असहनीय कमर दर्द और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की शिकायत थी।
अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सा क्षमता और विशेषज्ञता का प्रदर्शन देखने को मिला है। अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर 47 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल और दुर्लभ फिओक्रोमोसायटोमा गांठ को लेप्रोस्कोपी पद्धति से सफलतापूर्वक हटा दिया। इस सर्जरी के बाद मानो मरीज को नया जीवन मिल गया।इस सर्जरी की विशेषता यह रही कि मरीज को 21 वर्ष पहले भी इसी गांठ की सर्जरी सिविल अस्पताल में हुई थी। सामान्यतः ऐसी गांठ दूसरी बार नहीं होती, लेकिन इस मरीज को वर्षों बाद फिर वही समस्या हुई। पिछले कुछ दिनों से उन्हें असहनीय कमर दर्द और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की शिकायत थी। जांच की गई तो 66 मिमी लंबी और 64 मिमी चौड़ी गांठ पाई गई, जो मुख्य धमनियों और आंतों से चिपकी हुई थी।
अस्पताल के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. श्रेणिक शाह के नेतृत्व में लगभग चार घंटे चली इस सर्जरी में डॉक्टरों ने बिना बड़ी चीर-फाड़ किए केवल लेप्रोस्कोपी तकनीक से गांठ को बाहर निकाला। ऑपरेशन के दौरान ब्लड प्रेशर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण एनेस्थीसिया टीम की भूमिका बेहद अहम रही। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। उनका कहना है कि फिलहाल मरीज की हालत बेहतर है। यूरोलॉजी विभाग ने 2363 लेप्रोस्कोपी सर्जरी की हैं, जिनमें 43 एड्रिनालेक्टोमी शामिल हैं।
सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार जिस सर्जरी का खर्च निजी अस्पतालों में लगभग 10 लाख रुपए होता है, वही यहां पूरी तरह नि:शुल्क की गई। उनके अनुसार अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कुशलता, टीमवर्क और आधुनिक उपचार पद्धतियों का उत्कृष्ट उदाहरण है।