अहमदाबाद. देश में तेजी से बढ़ते अस्थमा के मामलों के बीच विशेषज्ञों ने सूजनरोधी इनहेलर (इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स) तक आसान पहुंच को अत्यावश्यक बताया है। ग्लोबल इनीशिएव फॉर अस्थमा के मार्गदर्शन में 5 मई को मनाए जाने वाले विश्व अस्थमा दिवस की इस वर्ष की थीम भी इसी पर केंद्रित है।
विश्व अस्थमा दिवस 5 मई पर विशेष:: भारत में ही 3 से 3.5 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित
राजेश भटनागर
अहमदाबाद. देश में तेजी से बढ़ते अस्थमा के मामलों के बीच विशेषज्ञों ने सूजनरोधी इनहेलर (इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स) तक आसान पहुंच को अत्यावश्यक बताया है। ग्लोबल इनीशिएव फॉर अस्थमा के मार्गदर्शन में 5 मई को मनाए जाने वाले विश्व अस्थमा दिवस की इस वर्ष की थीम भी इसी पर केंद्रित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थमा दुनिया की सबसे आम दीर्घकालिक गैर-संक्रामक बीमारियों में शामिल है, जिससे वैश्विक स्तर पर 26 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं और हर साल 4.5 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। इनमें बड़ी संख्या रोकी जा सकती है। भारत में ही 3 से 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जबकि हर साल 1.5 लाख से अधिक मौतें दर्ज होती हैं।
राज्य की 3-5 फीसदी आबादी प्रभावित संभव
गुजरात में भी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण, औद्योगीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण अस्थमा के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। अनुमान है कि राज्य की 3% से 5% आबादी इससे प्रभावित हो सकती है, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग अधिक संवेदनशील हैं।
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ कृतेश एस त्रिपाठी के अनुसार समय पर पहचान, सही उपचार और इनहेलर का नियमित उपयोग अस्थमा को पूरी तरह नियंत्रित कर सकता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी, सामाजिक संकोच और दवाओं तक सीमित पहुंच बड़ी चुनौतियां हैं।
वायु प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन प्रमुख ट्रिगर
विशेषज्ञ बताते हैं कि वायु प्रदूषण, वाहन का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य की धूल और तंबाकू का धुआं प्रमुख ट्रिगर हैं। साथ ही, लक्षणों की देर से पहचान और इनहेलर थेरेपी का कम उपयोग स्थिति को और गंभीर बना देता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बार-बार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय सलाह लें, इनहेलर का सही उपयोग करें और धूल-धुएं से बचाव रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर जागरूकता, किफायती इलाज और स्वच्छ हवा सुनिश्चित कर अस्थमा के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है और अनावश्यक मौतों को रोका जा सकता है।