
Ahmedabad. साबरमती नदी पर स्थित ऐतिहासिक वासणा बैराज ने मानसून से ठीक पहले नया रूप ले लिया है। सामान्य तौर पर चार से पांच महीने में पूरी होने वाली जटिल तकनीकी कवायद को जल संसाधन विभाग ने 35 दिनों में पूरा कर दिया है। करीब 10.15 करोड़ रुपए की लागत से वासणा बैराज के 19 नए गेट लगाए गए हैं और 10 पुराने गेटों की मरम्मत की गई है। इसके साथ ही बैराज में दोबारा पानी भरना भी शुरू हो गया है।
इस कार्य से न केवल अहमदाबाद की बाढ़ नियंत्रण क्षमता मजबूत बनी है, बल्कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।वर्ष 1976 में निर्मित वासणा बैराज अहमदाबाद के जल प्रबंधन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। शहर में साबरमती नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने और मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति से निपटने में इसकी अहम भूमिका रहती है। वर्ष 2025 में डैम सेफ्टी एक्ट के तहत किए गए प्री-मानसून निरीक्षण में बैराज के कई गेटों के नवीनीकरण और मरम्मत की आवश्यकता सामने आई थी। इसके बाद गत 17 अप्रेल से बैराज को पूरी तरह खाली कर युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया गया था।4
जल संसाधन विभाग की यांत्रिक शाखा ने चार महीनों में गेटों के विभिन्न हिस्सों का फैब्रिकेशन तैयार किया और पानी खाली होने के बाद मात्र 35 दिनों में पांच हैवी ड्यूटी मोबाइल क्रेन की मदद से गेट बदलने और मरम्मत का पूरा अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस दौरान लगभग 460 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील का उपयोग किया गया। साथ ही सिविल विभाग ने बैराज की मौजूदा संरचना को और मजबूत करने के लिए भी जरूरी कार्य किए।
वासणा बैराज में वर्तमान में कुल 30 गेट हैं। इनमें अलग-अलग आकार के गेट शामिल हैं और आवश्यकता के अनुसार पूर्व में भी चरणबद्ध तरीके से कुछ गेट बदले गए थे। हालांकि इस बार इतने बड़े पैमाने पर एक साथ किए गए नवीनीकरण को बैराज के इतिहास की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में माना जा रहा है। मनपा का दावा है कि मानसून से पहले इस कार्य के पूरा होने से वासणा बैराज अब पहले से अधिक सुरक्षित और सक्षम हो गया है। इससे शहर की जल सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।